केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को लोकसभा में ‘भारत की निर्णायक लड़ाई नक्सलवाद के खिलाफ’ पर बहस के दौरान कहा कि माओवाद का विकास से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने बताया कि यह विचारधारा आदिवासियों में केवल सत्ता हथियाने के लिए फैलायी गई थी। शाह ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और कांग्रेस पर नक्सलवाद की विचारधारा को स्वीकार करने का आरोप लगाया।
शाह ने कहा, "बारह राज्यों में, जिनमें छत्तीसगढ़ शामिल है, रेड कॉरिडोर था और वहां के सैकड़ों लोग, खासकर युवा, अपनी जान गंवा चुके थे।" हालांकि, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने नक्सलवाद को समाप्त करने के लिए पिछले 12 वर्षों में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
गृह मंत्री ने कहा कि माओवाद का भारत में लगभग अंत हो चुका है। उन्होंने बस्तर की स्थिति का उदाहरण दिया, जहाँ पहले ‘रेड टेरर’ के कारण विकास नहीं पहुँच सका था, लेकिन अब उस पर काबू पाया जा चुका है और बस्तर विकास की राह पर है।
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शाह ने यह भी कहा कि संविधान में अन्याय का सामना करने का प्रावधान है, लेकिन हथियार उठाना समाधान नहीं है। जो लोग नक्सलवाद का समर्थन करते हैं, उन्हें यह समझना होगा कि हथियार उठाने वालों को उसका परिणाम भुगतना पड़ेगा।
कांग्रेस पर हमला करते हुए शाह ने कहा कि कांग्रेस ने उन योजनाओं को लागू नहीं होने दिया जो आदिवासियों के विकास के लिए थीं, क्योंकि ये उनके भ्रष्ट राजनीतिक एजेंडे को नुकसान पहुँचाती थीं।
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