ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तर प्रदेश में अपनी चुनावी सक्रियता तेज कर दी है। रविवार को कानपुर पहुंचने से पहले उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा) और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर निशाना साधा। ओवैसी ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुस्लिम समाज का इस्तेमाल मुख्य रूप से वोट बैंक के तौर पर किया गया।
ओवैसी ने कहा कि राज्य में विकास और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर पर्याप्त काम नहीं हो रहा है। उन्होंने दावा किया कि अलग-अलग सरकारों के दौरान अलग-अलग सामाजिक समूहों का राजनीतिक प्रभाव रहा, लेकिन मुस्लिम समाज की राजनीतिक हिस्सेदारी को लेकर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने कानून-व्यवस्था और कथित एनकाउंटर के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा।
मस्जिदों और मुस्लिम संपत्तियों से जुड़े विवादों का जिक्र करते हुए ओवैसी ने योगी आदित्यनाथ सरकार पर मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाए जाने का आरोप लगाया। ये आरोप ओवैसी के राजनीतिक बयानों का हिस्सा हैं।
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सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए ओवैसी ने सवाल किया कि सपा मुस्लिम समाज के मुद्दों पर खुलकर क्यों नहीं बोलती। उन्होंने 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान सपा के साथ गठबंधन की कोशिश का भी जिक्र किया। ओवैसी ने कहा कि उस समय उनकी पार्टी ने उन सीटों पर गठबंधन की पेशकश की थी, जहां सपा के विधायक नहीं थे।
आगामी 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर ओवैसी ने कहा कि एआईएमआईएम उत्तर प्रदेश में एक राजनीतिक विकल्प के रूप में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी का मुकाबला करने के लिए समान विचारधारा वाले दलों के साथ गठबंधन की संभावना खुली है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी किसी पार्टी के साथ गठबंधन को लेकर अंतिम बातचीत नहीं हुई है।
ओवैसी ने कहा कि गठबंधन होने पर ही यह तय होगा कि एआईएमआईएम कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक दलों ने मुस्लिम समाज से चुनावों में समर्थन तो लिया, लेकिन उसे पर्याप्त राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं दिया।
जयंत चौधरी को लेकर अखिलेश यादव के कथित बयान पर भी ओवैसी ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राजनीतिक नेताओं को भाषा की मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए और किसी बयान से पहले उसके राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव पर विचार करना चाहिए।
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