राजस्थान कांग्रेस में नगर निकाय चुनाव में पार्टी की हार के बाद अंदरूनी विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब पूर्व मंत्री और भरतपुर के पूर्व राजघराने से जुड़े विश्वेंद्र सिंह ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा पर गंभीर आरोप लगाते हुए उनके इस्तीफे की मांग की है।
विश्वेंद्र सिंह ने बुधवार को भरतपुर में पार्षदों के टिकट वितरण में अनियमितता का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जिला अध्यक्षों ने वास्तविक पार्टी कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज कर अपने पसंदीदा लोगों को टिकट दिए, जिसके कारण कांग्रेस को नगर निकाय चुनाव में नुकसान हुआ।
अशोक गहलोत के करीबी माने जाने वाले विश्वेंद्र सिंह ने डोटासरा के परिवार के सदस्यों को भर्ती परीक्षाओं में कथित लाभ मिलने का भी आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि 2016 और 2018 की भर्तियों में डोटासरा की बहू प्रतिभा पूनिया, उनके भाई गौरव पूनिया और बहन प्रज्ञा पूनिया को साक्षात्कार में समान 80-80 अंक मिले। उन्होंने इन मामलों की विस्तृत जांच की मांग की।
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विश्वेंद्र सिंह ने डोटासरा के बेटे अविनाश सिंह के आरएएस चयन और ओबीसी नॉन-क्रीमी लेयर प्रमाणपत्र से कथित लाभ का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने डोटासरा के शिक्षा मंत्री रहने के दौरान आरईईटी में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग भी की।
उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और भाजपा सरकार से मामले की विस्तृत जांच कर कार्रवाई करने की अपील की। विश्वेंद्र सिंह ने कहा कि ऐसे आरोपों का सामना कर रहे नेताओं को इस्तीफा देना चाहिए या कांग्रेस आलाकमान को कार्रवाई करनी चाहिए।
भरतपुर नगर निगम की 65 सीटों में भाजपा ने 20, कांग्रेस ने सात और निर्दलीय उम्मीदवारों ने 36 सीटें जीती थीं। बहुमत के लिए 33 पार्षदों की जरूरत थी।
वहीं, गोविंद सिंह डोटासरा ने मतभेदों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कांग्रेस मजबूत हो रही है। उन्होंने कहा कि पार्टी में कोई मतभेद नहीं है और भाजपा कथित तौर पर गलत सूचना फैलाकर कांग्रेस में दरार दिखाने की कोशिश कर रही है।
विश्वेंद्र सिंह के बयान से डोटासरा और अशोक गहलोत खेमे के बीच चल रही सार्वजनिक खींचतान को लेकर चर्चा फिर तेज हो गई है।
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