असम के मंत्री अतुल बोरा ने आत्मनिर्भर पंचायतों के निर्माण के लिए स्थानीय राजस्व स्रोतों को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि पंचायतों की वित्तीय क्षमता बढ़ाने से ग्रामीण विकास योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू करने और स्थानीय जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत असम के गोलाप बोर्बोरा राज्य पंचायत एवं ग्रामीण विकास संस्थान (जीबीएसआईपीआरडी) ने गुरुवार और शुक्रवार को दो दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित की। इसमें पंचायतों के अपने राजस्व स्रोतों को मजबूत करने की रणनीति और भविष्य की कार्ययोजना पर विचार-विमर्श किया गया।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य पंचायतों को वित्तीय रूप से अधिक सक्षम बनाना और सरकारी अनुदानों पर उनकी निर्भरता कम करने के उपाय तलाशना था। अपने राजस्व स्रोतों में स्थानीय कर, शुल्क और पंचायतों की संपत्तियों से होने वाली आय जैसे माध्यम शामिल हो सकते हैं। इन स्रोतों का प्रभावी प्रबंधन पंचायतों को स्थानीय विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध करा सकता है।
और पढ़ें: वीआईपी काफिले के लिए एंबुलेंस न रोकें: विवाद के बीच असम सरकार का सख्त आदेश
पंचायतों की वित्तीय मजबूती ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं, स्वच्छता, पेयजल, सड़क और अन्य सार्वजनिक सेवाओं को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसके लिए राजस्व संग्रह की पारदर्शी व्यवस्था, उचित लेखा-जोखा और स्थानीय स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित करना भी आवश्यक है।
राज्य स्तरीय कार्यशाला में पंचायतों के राजस्व संग्रह को बढ़ाने और उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए रोडमैप पर चर्चा की गई। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में कार्यशाला के दौरान घोषित विशिष्ट लक्ष्य, समयसीमा या प्रस्तावित राजस्व सुधारों का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है।
और पढ़ें: असम में दुर्गा पूजा पर बड़े ऐलान, अरुणोदय लाभार्थियों को मिलेंगे 1500 रुपये, चाय मजदूरों को 20% बोनस