भारतीय वायुसेना की घटती ताकत का समाधान बन सकते हैं ‘ऑटोनॉमस विंगमैन’
भारतीय वायुसेना के सामने लड़ाकू विमानों की संख्या और तकनीकी क्षमता बनाए रखने की बड़ी चुनौती है। एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने 3 अक्टूबर को एयर फोर्स डे प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि लड़ाकू क्षमता में गिरावट रोकने के लिए वायुसेना को हर साल करीब दो नए फाइटर स्क्वाड्रन चाहिए। फिलहाल वायुसेना के पास लगभग 30 लड़ाकू स्क्वाड्रन हैं, जबकि स्वीकृत संख्या 42 है।
पाकिस्तान वायुसेना के पास करीब 440 लड़ाकू विमान हैं, जबकि भारतीय वायुसेना के पास लगभग 550 विमान हैं। दूसरी ओर, चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एयर फोर्स के पास 2,200 से अधिक विमान हैं, जिनमें जे-20 जैसे स्टील्थ लड़ाकू विमान और लंबी दूरी के बमवर्षक शामिल हैं। भारत के पास 180 तेजस एमके-1A का ऑर्डर और 114 राफेल विमानों की बातचीत चल रही है, लेकिन इससे चीन के जे-20 और भविष्य के जे-36 तथा जे-50 जैसे विमानों से तकनीकी अंतर पूरी तरह खत्म नहीं होगा।
और पढ़ें: हिंडन में दिखी वायुसेना की ताकत, 400 किमी ब्रह्मोस से लैस सुखोई-30 एमकेआई
ऐसे में कोलैबोरेटिव कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (सीसीए) यानी स्वायत्त विंगमैन अहम भूमिका निभा सकते हैं। ये मानवयुक्त लड़ाकू विमानों के साथ उड़कर सेंसर और हथियारों की पहुंच बढ़ा सकते हैं तथा जोखिम वाले मिशनों में आगे रहकर काम कर सकते हैं।
लेख के अनुसार, लगभग 550 मानवयुक्त विमानों में 60 प्रतिशत सेवा-योग्यता मानें तो करीब 330 विमान उपलब्ध रहेंगे। प्रत्येक के साथ एक सीसीए जोड़ने पर लगभग 330 स्वायत्त विमान चाहिए होंगे। प्रति विमान 2.5 करोड़ डॉलर की अनुमानित लागत पर परियोजना करीब 8.3 अरब डॉलर की हो सकती है।
निकट अवधि में सुखोई-30एमकेआई से शुरुआत की जा सकती है। दो सीटों वाले इन विमानों में हथियार प्रणाली अधिकारी सीसीए को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं। इससे शुरुआती जरूरत करीब 175 सीसीए तक सीमित हो सकती है।
अमेरिका में शील्ड एआई, एंड्यूरिल और जनरल एटॉमिक्स इस क्षेत्र में आगे हैं। भारत में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड का कैट्स वॉरियर और न्यूस्पेस रिसर्च एंड टेक्नोलॉजीज का अभिमन्यु सीसीए संभावित विकल्प हैं।
एपी सिंह के शब्दों में, “तकनीक में देरी, तकनीक से वंचित होने के बराबर है।” सीसीए मानवयुक्त लड़ाकू विमानों की जगह नहीं लेंगे, लेकिन तेजी से विकसित किए जाने पर वायुसेना की पहुंच, क्षमता और जीवित रहने की संभावना बढ़ा सकते हैं।
और पढ़ें: ऑपरेशन सिंदूर को याद कर वायुसेना प्रमुख बोले- दुनिया ने करीब से देखी भारत की विनाशकारी ताकत