देहरादून की सीबीआई अदालत ने योग गुरु बाबा रामदेव के करीबी सहयोगी और पतंजलि योगपीठ के महासचिव आचार्य बालकृष्ण को 15 साल पुराने फर्जी दस्तावेज मामले में बरी कर दिया है। विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीबीआई) की अदालत ने सह-आरोपी नरेश चंद्र द्विवेदी को भी आरोपों से मुक्त कर दिया।
यह मामला कथित तौर पर फर्जी शैक्षणिक और अन्य दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट हासिल करने से जुड़ा था। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 2011 में एक शिकायत के बाद मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि बालकृष्ण नेपाली नागरिक हैं और उन्होंने कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर भारतीय पासपोर्ट हासिल किया।
मामले की लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने दोनों आरोपियों को बरी कर दिया। नरेश चंद्र द्विवेदी पर बालकृष्ण को कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज उपलब्ध कराने का आरोप था।
और पढ़ें: भारत में बनी बुलेट ट्रेन का पहला बॉडी फ्रेम तैयार, 2027 में ट्रैक पर होगा परीक्षण: अश्विनी वैष्णव
अदालत के फैसले के बाद आचार्य बालकृष्ण ने न्याय व्यवस्था में अपना पूरा विश्वास जताया। हालांकि, उन्होंने कहा कि लंबे समय तक चली कानूनी प्रक्रिया उनके लिए बेहद थकाऊ रही। उन्होंने बताया कि इस दौरान उन्हें अपमान, बदनामी और अन्य लोगों की नकारात्मक सोच का सामना करना पड़ा।
बालकृष्ण ने कहा कि कानूनी प्रक्रिया के दौरान उन्हें कई तरह की मानसिक परेशानियों से गुजरना पड़ा, लेकिन अंततः अदालत के फैसले से उन्हें राहत मिली। करीब डेढ़ दशक पुराने इस मामले में अदालत के फैसले के बाद दोनों आरोपियों के खिलाफ चल रही कार्यवाही समाप्त हो गई।
और पढ़ें: छत्रपति संभाजीनगर में एमपीएससी पेपर लीक के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन, पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था की मांग