पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में “बाबरी मस्जिद” नाम से मस्जिद निर्माण की शुरुआत के साथ ही राजनीतिक और सामाजिक माहौल गरमा गया है। निलंबित तृणमूल कांग्रेस विधायक हुमायूं कबीर ने आज इस परियोजना की औपचारिक शुरुआत की। धार्मिक अनुष्ठानों और कुरान पाठ के बाद मस्जिद की नींव रखी गई, जिसमें करीब 1,000 मौलवियों को आमंत्रित किया गया था। आयोजकों के अनुसार, दोपहर करीब 12:30 बजे से निर्माण कार्य शुरू किया गया।
कबीर, जो अब जन उन्नयन पार्टी के प्रमुख हैं, ने कहा कि मस्जिद का निर्माण अगले दो वर्षों में पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने अपने समर्थकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मंदिरों के निर्माण को सामान्य माना जाता है, लेकिन जब मुसलमान मस्जिद बनाना चाहते हैं तो विरोध शुरू हो जाता है। उन्होंने भरोसा जताया कि विरोध के बावजूद यह परियोजना तय समय में पूरी होगी।
निर्माण स्थल बेलडांगा में पहले से ही खुदाई, मजदूरों की तैनाती और निर्माण सामग्री की व्यवस्था कर दी गई थी। इससे पहले 6 दिसंबर को कबीर ने यहां परियोजना स्थल का उद्घाटन किया था, जहां हजारों लोगों ने नमाज अदा की और सामुदायिक भोज का आयोजन हुआ।
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इस घोषणा के बाद पश्चिम बंगाल से बाहर भी तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कई हिंदू संगठनों ने “बाबरी मस्जिद” नाम पर आपत्ति जताई है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर इस परियोजना के खिलाफ प्रदर्शन हुए। वहीं, उत्तर प्रदेश में विश्व हिंदू रक्षा परिषद के कुछ सदस्य विरोध के लिए मुर्शिदाबाद जाने की कोशिश कर रहे थे, जिन्हें पुलिस ने लखनऊ में रोक दिया।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्हें मस्जिद निर्माण से नहीं, बल्कि इसके नाम से आपत्ति है। उनका मानना है कि बाबर के नाम पर मस्जिद का नाम रखना उकसाने वाला कदम है। वहीं कबीर का कहना है कि यह परियोजना मुस्लिम समुदाय की भावनाओं और सम्मान से जुड़ी है।
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