इंदौर के भागीरथपुरा इलाके से लिए गए जल नमूनों की जांच रिपोर्ट में गंभीर खुलासा हुआ है। चिकित्सा अधिकारियों द्वारा की गई जांच के अनुसार, कुल 26 जल नमूनों में से लगभग एक-तिहाई नमूनों में बैक्टीरियल संक्रमण पाया गया है। यह रिपोर्ट गुरुवार को इंदौर नगर निगम (IMC) को सौंपी गई। रिपोर्ट सामने आने के बाद प्रशासन ने जल आपूर्ति लाइन की सफाई, लीकेज की मरम्मत और दूषित पानी को हटाकर नए पानी की आपूर्ति शुरू करने के कदम उठाए हैं।
पिछले 10 दिनों में दूषित पेयजल के कारण भागीरथपुरा क्षेत्र में लगभग 2,800 लोग बीमार पड़ चुके हैं। इनमें से 272 लोगों को विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। प्रशासन की ओर से जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस घटना में अब तक चार लोगों की मौत हुई है। हालांकि, स्थानीय निवासियों और क्षेत्रीय रिपोर्टों का दावा है कि मृतकों की संख्या 14 तक पहुंच चुकी है।
इंदौर के जिला कलेक्टर ने कहा कि पूरी जल आपूर्ति लाइन को साफ कर दिया गया है, जहां-जहां रिसाव था, उनकी मरम्मत की गई है और दूषित पानी को हटाकर ताजा पानी डाला गया है। इसके साथ ही, लंबे समय से लंबित नई जल आपूर्ति लाइन पर भी काम शुरू कर दिया गया है ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न उत्पन्न हो।
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इस गंभीर मामले को संज्ञान में लेते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने वर्ष 2026 के पहले ही दिन मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन को नोटिस जारी किया है। आयोग ने दो सप्ताह के भीतर इस पूरे मामले पर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। NHRC ने यह भी संकेत दिया है कि नागरिकों के स्वास्थ्य और सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता से जुड़ा यह मामला मानवाधिकारों के उल्लंघन की श्रेणी में आ सकता है।
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