आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में प्रवासी मजदूरों की बड़ी संख्या में घर वापसी देखी जा रही है। रेलवे स्टेशनों पर भारी भीड़ उमड़ रही है, जहां हजारों लोग लंबी दूरी तय कर अपने गृह जिलों की ओर लौट रहे हैं। इनमें से अधिकतर प्रवासी मालदा और मुर्शिदाबाद जिलों से जुड़े बताए जा रहे हैं।
ये लोग चेन्नई, मुंबई और केरल के विभिन्न हिस्सों से 36 से 72 घंटे की लंबी यात्रा कर वापस लौट रहे हैं। यात्रियों का कहना है कि वे मतदान को लेकर चिंतित हैं और उन्हें डर है कि यदि वे वोट नहीं डालेंगे तो उनका नाम मतदाता सूची से हटाया जा सकता है।
मुर्शिदाबाद जा रहे एक यात्री ने कहा, “वोट देना बहुत जरूरी है, नहीं तो हमारा नाम सूची से हट सकता है।” वहीं एक अन्य यात्री ने बताया कि उनका नाम सूची में है, लेकिन उन्हें डर है कि आगे चलकर समस्या हो सकती है, इसलिए वे घर लौट रहे हैं।
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भीड़ बढ़ने के कारण रेलवे स्टेशनों पर सुरक्षा बलों को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है, ताकि किसी तरह की अव्यवस्था या दुर्घटना न हो।
गौरतलब है कि ये प्रवासी मतदाता चुनाव परिणामों पर बड़ा असर डालते हैं, खासकर मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में इनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है।
चुनाव आयोग द्वारा विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के तहत पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची से करीब 90 लाख नाम हटाए गए हैं। इनमें से 28 फरवरी को जारी अंतिम सूची में लगभग 63 लाख नाम हटाए गए थे, जबकि बाद में सत्यापन प्रक्रिया के बाद 27 लाख और नाम हटाए गए।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 294 सीटों पर दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को होंगे, जबकि मतगणना 4 मई को की जाएगी।
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