पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन—SIR) के तहत हजारों लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं। चुनाव आयोग का कहना है कि कुछ मतदाताओं के साथ असामान्य रूप से अधिक बच्चों के नाम जुड़े पाए गए हैं, जिसके कारण यह कार्रवाई की गई। हालांकि, इस कदम को लेकर राजनीतिक विवाद भी तेज हो गया है।
पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने चुनाव आयोग पर मनमाने तरीके से सीमा (थ्रेशहोल्ड) तय करने का आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि जिन मतदाताओं के साथ छह या उससे अधिक बच्चों के नाम जुड़े हैं, ऐसे मतदाताओं की संख्या 2,06,056 है। लेकिन यदि यह सीमा बढ़ाकर 10 कर दी जाए, तो ऐसे मामलों की संख्या घटकर मात्र 8,682 रह जाती है। कांग्रेस का आरोप है कि कम सीमा तय कर आम लोगों को अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है।
कोलकाता नगर निगम (KMC) के वार्ड 61 के निवासी अल्तमिश फराज़ खान के परिवार का मामला भी इसी विवाद से जुड़ा है। उनके परिवार के सभी छह सदस्यों को SIR के तहत सुनवाई के लिए नोटिस भेजे गए। चार सदस्यों को इस आधार पर नोटिस मिला कि उन्होंने खुद को ऐसे व्यक्ति का पुत्र या पुत्री बताया है, जिसे छह अन्य लोग भी अपना पिता बता रहे हैं।
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अल्तमिश खान अपने भाइयों और बहन के साथ बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के निर्देश पर सुनवाई के लिए पहुंचे। उन्होंने कहा कि उन्हें बाद में एहसास हुआ कि यह पूरी प्रक्रिया मनमानी है, जबकि उन्होंने खुद को अपनी मां से जोड़ा था, जिनका नाम 2002 की मतदाता सूची में दर्ज था। इस पूरे मामले ने मतदाता सूची संशोधन की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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