मध्य प्रदेश के किसान इस समय उर्वरक की बढ़ती कीमतों और कम आपूर्ति को लेकर चिंतित हैं। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण भारत में उर्वरक की आपूर्ति प्रभावित हुई है। भोपाल के किसानों का कहना है कि अब उर्वरक सोने और चांदी की तरह कीमती हो गया है और उसे खरीदना मुश्किल हो गया है।
किसानों ने बताया कि पिछले साल की तुलना में इस बार उर्वरक की कीमतों में तेज वृद्धि हुई है। राजस्थान, मध्य प्रदेश और अन्य प्रदेशों से आने वाली रिपोर्ट्स में भी यही संकेत मिल रहे हैं कि उत्पादन और फसलों के लिए आवश्यक रसायनों की उपलब्धता घट रही है। किसानों ने कहा कि यदि समय पर उर्वरक नहीं मिला, तो खरीफ और रबी फसलों की पैदावार प्रभावित हो सकती है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि भारत अधिकांश उर्वरक को आयात करता है, और मध्य पूर्व से आपूर्ति में बाधा पड़ने पर इसकी कीमतें स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती हैं। उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि वह किसानों को राहत देने और कीमतों को स्थिर रखने के उपाय करें।
और पढ़ें: महाराष्ट्र के कृषि मंत्री ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात की
भोपाल के एक किसान ने कहा, "अब हमें उर्वरक के लिए बहुत सोच-समझकर बजट बनाना पड़ रहा है। यह हमारे लिए जीवन रेखा है, और बिना उर्वरक के खेती करना मुश्किल हो जाएगा।"
सरकार ने भी इस स्थिति पर ध्यान दिया है और आयात और घरेलू उत्पादन बढ़ाने के उपायों पर काम कर रही है। साथ ही, किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए वितरण तंत्र मजबूत किया जा रहा है।
और पढ़ें: खरीफ सीजन के लिए यूरिया और फॉस्फेट उर्वरक की आपूर्ति पर्याप्त, भारत उर्वरक संघ का बयान