भारतीय जनता पार्टी ने संगठन में पीढ़ीगत बदलाव की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 45 वर्षीय नितिन नवीन को अपना अब तक का सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया है। इस नियुक्ति को सत्तारूढ़ पार्टी में नई पीढ़ी के नेतृत्व के उभार के रूप में देखा जा रहा है। इसके उलट, देश की प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस को युवाओं को आगे बढ़ाने के अपने संकल्प को लागू करने में अब भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
कांग्रेस ने तीन साल से अधिक पहले चिंतन शिविर में यह प्रस्ताव पारित किया था कि संगठन के सभी स्तरों पर 50 प्रतिशत प्रतिनिधित्व युवाओं को दिया जाएगा। हालांकि, वर्तमान स्थिति इस संकल्प से काफी दूर नजर आती है।
कांग्रेस की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) के 36 सदस्यों की औसत आयु 67 वर्ष है। वहीं, CWC के 34 स्थायी आमंत्रित सदस्यों की औसत आयु 61 वर्ष और 15 विशेष आमंत्रित सदस्यों की औसत आयु 52 वर्ष बताई गई है। इन तीनों श्रेणियों को मिलाकर कांग्रेस नेतृत्व की औसत आयु लगभग 60 वर्ष बैठती है।
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कुल 85 सदस्यों और आमंत्रित नेताओं में से केवल 12 नेता, यानी करीब 14.1 प्रतिशत, ही 50 वर्ष से कम आयु के हैं। यह आंकड़ा कांग्रेस के ‘50 अंडर 50’ लक्ष्य से काफी पीछे है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी का यह कदम युवा मतदाताओं को आकर्षित करने और संगठन में ऊर्जा भरने की रणनीति का हिस्सा है। वहीं, कांग्रेस के भीतर नेतृत्व में पीढ़ीगत बदलाव की धीमी रफ्तार पार्टी की संगठनात्मक मजबूती और भविष्य की राजनीति पर सवाल खड़े कर रही है।
बीजेपी जहां युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाकर खुद को समय के अनुरूप ढालती दिख रही है, वहीं कांग्रेस को अपने घोषित लक्ष्यों को जमीन पर उतारने के लिए अब भी ठोस कदम उठाने की जरूरत महसूस की जा रही है।
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