पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपनी चुनावी रणनीति को नए सिरे से आकार देना शुरू कर दिया है। इस रणनीति की बुनियाद पार्टी के भीतर की वास्तविकताओं को स्वीकार करने और संगठनात्मक मजबूती पर ध्यान केंद्रित करने पर रखी गई है। पार्टी और उससे जुड़े व्यापक संघ परिवार ने तीन प्रमुख मुद्दों की पहचान की है, जिन पर विशेष रूप से काम करने की जरूरत है—जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करना, राज्य इकाई के भीतर एकता सुनिश्चित करना और तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार के खिलाफ मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाना।
सूत्रों के अनुसार, BJP नेतृत्व का मानना है कि जब तक पार्टी का संगठन जमीनी स्तर पर मजबूत नहीं होगा, तब तक मतदाताओं तक प्रभावी पहुंच संभव नहीं है। इसी कारण ग्रासरूट मोबिलाइजेशन को रणनीति का केंद्र बनाया गया है। इस दिशा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के साथ घनिष्ठ समन्वय को बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि संघ की जमीनी पकड़ और कैडर आधारित संरचना को चुनावी रणनीति में उपयोगी माना जाता है।
इसी कड़ी में RSS के पूर्व प्रांत प्रमुख और पश्चिम बंगाल व ओडिशा के लिए संघ के प्रभारी रह चुके प्रदीप जोशी को एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी जा रही है। उन्हें राज्य में RSS और BJP के बीच जमीनी स्तर पर बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी जाएगी। उनका कार्य विशेष रूप से बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ाने और संगठनात्मक तालमेल को मजबूत करने पर केंद्रित रहेगा।
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BJP के भीतर यह भी माना जा रहा है कि राज्य इकाई में आंतरिक मतभेद और गुटबाजी पार्टी की कमजोरी रही है। इसलिए पार्टी पहले अपने संगठन को एकजुट करने और आधार मतदाताओं को मजबूत करने पर ध्यान दे रही है, ताकि इसके बाद व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया जा सके।
इस रणनीति के तहत तृणमूल कांग्रेस सरकार के शासन, कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार और विकास से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाने की योजना है। BJP का लक्ष्य है कि वह संगठनात्मक मजबूती और मुद्दों के संयोजन से पश्चिम बंगाल में एक प्रभावी चुनावी चुनौती पेश करे।
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