आज के दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई का इस्तेमाल केवल चैटबॉट, फोटो एडिटिंग और कंटेंट तैयार करने तक सीमित नहीं है। कंपनियां अब भर्ती प्रक्रिया से लेकर कर्मचारियों की गतिविधियों की निगरानी तक में एआई आधारित तकनीक का इस्तेमाल कर रही हैं। इसी वजह से ‘बॉसवेयर’ शब्द तेजी से चर्चा में आया है।
बॉसवेयर ऐसे सॉफ्टवेयर और डिजिटल टूल्स को कहा जाता है, जिनकी मदद से कंपनियां कर्मचारियों की डिजिटल गतिविधियों पर नजर रख सकती हैं। कई मामलों में निगरानी नौकरी मिलने के बाद ही नहीं, बल्कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान भी शुरू हो सकती है।
कई कंपनियां उम्मीदवारों की स्क्रीनिंग के लिए एआई आधारित सिस्टम का इस्तेमाल करती हैं। ये सिस्टम रिज्यूम, अनुभव, कौशल और उपलब्धियों का विश्लेषण कर उम्मीदवारों की सूची तैयार कर सकते हैं। कुछ सिस्टम यह भी तय करने में मदद करते हैं कि कौन उम्मीदवार अगले चरण में जाएगा। यानी आपका रिज्यूम सिर्फ मानव संसाधन विभाग नहीं, बल्कि एल्गोरिदम भी पढ़ सकता है।
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नौकरी मिलने के बाद बॉसवेयर कर्मचारी के कंप्यूटर पर सक्रिय रहने का समय, इस्तेमाल किए गए एप्लिकेशन, लॉगिन टाइम, वेबसाइट विजिट और अन्य डिजिटल गतिविधियों को रिकॉर्ड कर सकता है। वर्क फ्रॉम होम और हाइब्रिड नौकरियों के बढ़ने के बाद ऐसे टूल्स का इस्तेमाल भी बढ़ा है।
हालांकि, हर बॉसवेयर एक जैसा नहीं होता। कौन-सा डेटा इकट्ठा किया जा रहा है और उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से होगा, यह कंपनी की नीति और इस्तेमाल किए जा रहे सॉफ्टवेयर पर निर्भर करता है।
निजता की सुरक्षा के लिए कर्मचारियों को कंपनी के लैपटॉप, ईमेल, वीपीएन और अन्य आधिकारिक सिस्टम पर निजी काम करने से बचना चाहिए। बैंकिंग, निजी ईमेल और संवेदनशील दस्तावेजों के लिए व्यक्तिगत उपकरण का इस्तेमाल बेहतर है।
नौकरी शुरू करते समय कंपनी की डेटा और प्राइवेसी नीति जरूर पढ़ें। यह भी समझें कि आपका डेटा कितने समय तक सुरक्षित रखा जाएगा। कंपनी की गोपनीय फाइलें किसी बाहरी एआई वेबसाइट या ऐप पर अपलोड करने से बचें। यदि निगरानी जरूरत से ज्यादा लगे तो कंपनी की नीति और लागू कानूनों के तहत अपने अधिकारों की जानकारी लें।
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