भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) ने तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) से संपर्क कर मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग की है। पार्टी का आरोप है कि पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) और बीआरएस के खिलाफ मुख्यमंत्री द्वारा दिया गया बयान “अत्यंत भड़काऊ, नफरत फैलाने वाला और हिंसा के लिए उकसाने वाला” है।
सोमवार को बीआरएस के एक प्रतिनिधिमंडल ने डीजीपी से मुलाकात कर मुख्यमंत्री के खिलाफ विस्तृत शिकायत सौंपी। शिकायत में कहा गया है कि 18 जनवरी को खम्मम में आयोजित एक सार्वजनिक सभा के दौरान मुख्यमंत्री ने अपने संवैधानिक पद का गंभीर दुरुपयोग किया।
बीआरएस का आरोप है कि रेवंत रेड्डी द्वारा बीआरएस को “100 मीटर गड्ढे खोदकर दफन करने” और गांव-गांव से पार्टी के अस्तित्व को “ध्वस्त करने” जैसे बयान देना आपराधिक धमकी और शत्रुता को बढ़ावा देने की श्रेणी में आता है। पार्टी ने कहा कि राज्य के सर्वोच्च कार्यकारी पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा इस तरह की भाषा केवल राजनीतिक बयानबाजी नहीं है, बल्कि इससे हिंसा भड़कने, असामाजिक तत्वों को बढ़ावा मिलने और सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका है।
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बीआरएस ने चेतावनी दी कि इन बयानों को समर्थक पार्टी कार्यकर्ताओं को परेशान करने, उन पर हमला करने या सामाजिक बहिष्कार करने की अनुमति के रूप में भी देख सकते हैं, खासकर राजनीतिक रूप से संवेदनशील ग्रामीण इलाकों में।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि ये टिप्पणियां केसीआर को अपमानित करने के उद्देश्य से की गईं, जिन्हें बीआरएस ने तेलंगाना राज्य के निर्माता और व्यापक रूप से सम्मानित नेता बताया है। पार्टी के अनुसार, इस तरह के हमले से तेलंगाना आंदोलन से जुड़े लाखों लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं और राज्य की लोकतांत्रिक संस्कृति को नुकसान पहुंचा है।
बीआरएस ने संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का हवाला देते हुए कहा कि राजनीतिक कार्यकर्ताओं को समान कानूनी संरक्षण और सम्मानपूर्वक जीवन का अधिकार है। पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का भी उल्लेख किया, जिनमें सार्वजनिक पदों पर बैठे व्यक्तियों की भाषण में अधिक जिम्मेदारी तय की गई है।
पार्टी ने मुख्यमंत्री के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करने, भाषण से जुड़े सभी वीडियो, ऑडियो और सोशल मीडिया साक्ष्यों को सुरक्षित रखने तथा पार्टी कार्यकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
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