संसद का बजट सत्र 16 अप्रैल से फिर से शुरू होगा और इस बार सभी की निगाहें महिला आरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयकों पर टिकी हैं। सरकार लोकसभा की संख्या को 543 से बढ़ाकर 816 सीटों तक करने की योजना बना रही है ताकि महिलाओं के लिए आरक्षण जल्द लागू किया जा सके। सूत्रों के अनुसार, सत्र लगभग तीन दिनों तक चल सकता है और प्रस्तावित विधेयक सबसे पहले लोकसभा में पेश किए जाएंगे।
यह योजना नारी शक्ति वंदन अधिनियम से जुड़ी है, जिसका उद्देश्य संसद में महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें सुनिश्चित करना है। सरकार का मानना है कि इस कानून को लागू करने का समय आ गया है और उन्होंने विपक्षी दलों के संपर्क में रहते हुए प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तैयारी की है। संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि एक बड़ा विधेयक जल्द उठाया जाएगा और इसके बारे में अन्य पार्टियों से पहले ही विचार-विमर्श किया जा चुका है।
विपक्ष ने समय पर सवाल उठाए हैं और कहा कि चुनाव के दौरान सरकार इस प्रक्रिया को राजनीतिक लाभ के लिए जल्दी में ला रही है। विपक्ष नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि महिला आरक्षण का समर्थन है, लेकिन विधेयक लाने का तरीका और समय महत्वपूर्ण है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी कहा कि पहले यह कानून जनगणना और परिसीमन से जोड़ा गया था, अब इसे बिना उन प्रक्रियाओं के आगे बढ़ाया जा रहा है।
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राज्यसभा में भी इस मुद्दे पर तीखी बहस हुई। हाउस लीडर जेपी नड्डा ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि कानून लाने का अधिकार सरकार का है। वहीं कई विपक्षी सदस्य चुनाव के बाद सभी दलों की बैठक की मांग कर रहे हैं। सांसदों ने आरक्षण में उप-कोटा, राज्य विधानसभाओं में समान व्यवस्था और छोटे राज्यों पर प्रभाव जैसी चिंताओं को भी उठाया है।
सरकार का कहना है कि यह कदम केवल महिलाओं के लिए किए गए वादे को पूरा करने का प्रयास है।
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