तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। पूर्व एआईएडीएमके (अन्नाद्रमुक) मंत्री और वरिष्ठ नेता सी. विजयभास्कर ने मंगलवार को अपनी विधायक (एमएलए) पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपना इस्तीफा पत्र तमिलनाडु विधानसभा के अध्यक्ष जे.सी.डी. प्रभाकर को सौंपा। अध्यक्ष ने बताया कि विजयभास्कर का इस्तीफा हस्तलिखित था, नियमों के अनुरूप था और इसलिए इसे स्वीकार कर लिया गया है।
सी. विजयभास्कर पुदुकोट्टई जिले की वायरलिमलाई विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व 2011 से करते आ रहे थे। उन्होंने इस सीट से लगातार चार बार जीत दर्ज की थी—2011, 2016, 2021 और 2026 के विधानसभा चुनावों में।
वह पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता, ओ. पन्नीरसेल्वम और एडप्पादी के. पलानीस्वामी की सरकारों में 2013 से 2021 तक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री भी रह चुके हैं।
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हाल ही में हुए राजनीतिक घटनाक्रम में विजयभास्कर उन एआईएडीएमके बागी नेताओं में शामिल थे जिन्होंने 13 मई को विधानसभा में हुए विश्वास मत के दौरान टीवीके (तमिलगा वेट्री कज़गम) सरकार के पक्ष में मतदान किया था। इससे पहले भी चार अन्य एआईएडीएमके विधायकों ने इस्तीफा देकर सत्तारूढ़ टीवीके का दामन थाम लिया था।
इस्तीफे से पहले विजयभास्कर ने बिना सीधे पार्टी प्रमुख एडप्पादी के. पलानीस्वामी का नाम लिए नेतृत्व पर तीखा हमला किया था। उन्होंने कहा कि “नेतृत्व न तो अधिकार है और न ही अहंकार, बल्कि यह सभी को साथ लेकर चलने की भावना है।”
विजयभास्कर ने यह भी सवाल उठाया था कि जब नेतृत्व अपने कार्यकर्ताओं के दिल नहीं जीत सकता, तो जनता का विश्वास कैसे जीतेगा।
उनका इस्तीफा एआईएडीएमके के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है क्योंकि वह वायरलिमलाई सीट से लगातार चार बार विजेता रहे थे और क्षेत्र में मजबूत जनाधार रखते थे। उनके जाने से तमिलनाडु की राजनीतिक समीकरणों पर भी असर पड़ने की संभावना है।
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