श्री पाद्रे ने कहा है कि काजू सेब से तैयार किए गए 50 से अधिक मूल्यवर्धित उत्पाद आज भी आम लोगों और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग तक नहीं पहुंच पाए हैं। उन्होंने चिंता जताई कि सरकारी अनुसंधान संस्थानों द्वारा विकसित कई उपयोगी उत्पाद अब भी केवल प्रयोगशालाओं और अलमारियों तक सीमित हैं।
उन्होंने यह बात कदरी पार्क में आयोजित तीन दिवसीय काजू सेब, आम और कटहल मेले के उद्घाटन के दौरान कही। इस मेले का आयोजन रायता कुदला प्रतिष्ठाना, सिरी तोटागारिके संघ और सवायव कृषिका ग्राहक बलगा द्वारा किया गया है।
श्री पाद्रे ने कहा कि दो सरकारी अनुसंधान संस्थानों ने काजू सेब से जूस, जैम, सिरका, कैंडी और अन्य खाद्य उत्पाद विकसित किए हैं। लेकिन इन उत्पादों का व्यावसायिक स्तर पर उत्पादन नहीं हो पाया, जिसके कारण किसानों और उपभोक्ताओं को इसका लाभ नहीं मिल सका।
और पढ़ें: युवा वैज्ञानिक शोध में नए कीर्तिमान स्थापित करें: राज्यपाल कविंदर गुप्ता
उन्होंने कहा कि काजू सेब पोषण से भरपूर होता है और इससे किसानों की आय बढ़ाने की बड़ी संभावना है। यदि इन उत्पादों को बाजार तक पहुंचाया जाए तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है।
मेले में स्थानीय किसानों, उद्यमियों और उपभोक्ताओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया। यहां आम, कटहल और काजू से जुड़े कई उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि आधारित प्रसंस्करण उद्योग को बढ़ावा देकर किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत उपलब्ध कराया जा सकता है। इसके लिए सरकार और निजी क्षेत्र के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत बताई गई।
श्री पाद्रे ने युवाओं और स्टार्टअप्स से भी कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण क्षेत्र में आगे आने की अपील की।
और पढ़ें: किसानों के लिए संसाधनों की नहीं होगी कमी: राजनाथ सिंह ने उन्नत कृषि महोत्सव का उद्घाटन किया