केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली से जुड़े विवाद के बीच सीओईएमपीटी (COEMPT) को दिए गए ठेके पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। मंत्रालय ने सीबीएसई से टेंडर प्रक्रिया, अनुबंध प्रदान करने की प्रक्रिया और निर्णय लेने में शामिल अधिकारियों की पूरी जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है।
यह कदम उस समय उठाया गया है जब पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया के दौरान कई छात्रों ने ओएसएम पोर्टल पर अपलोड की गई उत्तर पुस्तिकाओं में कथित गड़बड़ियों की शिकायत की थी। मंत्रालय टेंडर प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं की समीक्षा कर रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया गया था या नहीं।
सूत्रों के अनुसार, यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या प्रक्रियागत चूक सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
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जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि वर्तमान अनुबंध के तहत सीबीएसई के पास सीओईएमपीटी को ब्लैकलिस्ट करने का अधिकार नहीं है। अगस्त 2025 में जारी मूल टेंडर में गंभीर लापरवाही या अनुबंध उल्लंघन की स्थिति में कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने का प्रावधान था। हालांकि, सितंबर 2025 में जारी संशोधन (कोरिजेंडम) के माध्यम से यह प्रावधान हटा दिया गया।
मौजूदा अनुबंध के तहत सीबीएसई कंपनी पर आर्थिक दंड लगा सकता है, सुरक्षा जमा राशि जब्त कर सकता है और अनुबंध समाप्त कर सकता है, लेकिन उसे ब्लैकलिस्ट नहीं कर सकता। अनुबंध में गंभीर तकनीकी समस्याओं के समाधान में देरी होने पर एक लाख रुपये तक के जुर्माने का भी प्रावधान है।
विवाद की शुरुआत तब हुई जब कक्षा 12 के छात्र वेदांत ने आरोप लगाया कि पुनर्मूल्यांकन के दौरान पोर्टल पर अपलोड की गई भौतिकी की उत्तर पुस्तिका उसकी नहीं थी। इसके बाद कई अन्य छात्रों ने भी ऐसी शिकायतें कीं। रिपोर्टों के अनुसार, लगभग 98 लाख उत्तर पुस्तिकाओं की डिजिटल स्कैनिंग में करीब 20 मामलों में उत्तर पुस्तिकाओं के मिश्रण की समस्या सामने आई थी।
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