केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह नीट (NEET) परीक्षा के प्रश्नपत्र की छपाई से लेकर परीक्षा केंद्रों पर छात्रों तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया और उसमें अपनाए गए सुरक्षा उपायों का विवरण अदालत के सामने रखेगी।
केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट की पीठ को जानकारी दी कि सरकार एक हलफनामे के माध्यम से प्रश्नपत्र तैयार करने, सुरक्षित रखने और छात्रों तक पहुंचाने की पूरी कार्यप्रणाली को रिकॉर्ड में लाना चाहती है।
इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ कर रही थी। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कहा कि वह यह स्पष्ट करना चाहती है कि नीट प्रश्नपत्र की सुरक्षा के लिए शुरुआत से लेकर अंतिम चरण तक कौन-कौन से कदम उठाए जाते हैं।
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सरकार का कहना है कि प्रश्नपत्र की छपाई, परिवहन, भंडारण और परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने की प्रक्रिया में कई स्तरों पर सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाती है। केंद्र अब अदालत के सामने इन सभी प्रक्रियाओं का विस्तृत ब्यौरा पेश करेगा।
इस मामले में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेताओं की ओर से भी याचिका दाखिल की गई है। याचिका में सरकार द्वारा गठित नंदन नीलेकणी के नेतृत्व वाली उच्चस्तरीय टास्क फोर्स की सिफारिशों का उल्लेख किया गया है। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि वे यह देखना चाहते हैं कि ऑनलाइन माध्यम से नीट परीक्षा आयोजित करने को लेकर टास्क फोर्स क्या सुझाव देती है।
नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं और प्रश्नपत्र सुरक्षा को लेकर पिछले समय में कई सवाल उठे हैं। छात्रों और अभिभावकों की चिंताओं को देखते हुए मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा है।
केंद्र सरकार ने अदालत को भरोसा दिलाया है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपनाई जाने वाली पूरी प्रक्रिया को सार्वजनिक रिकॉर्ड में लाया जाएगा। अब सरकार द्वारा दाखिल किए जाने वाले हलफनामे के बाद इस मामले में आगे की सुनवाई होगी।
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