तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को एक और बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी की वरिष्ठ नेता और ममता बनर्जी की करीबी सहयोगी चंद्रिमा भट्टाचार्य ने अपने सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा सीधे ममता बनर्जी को सौंपते हुए पुष्टि की कि वह राज्य अध्यक्ष सहित पार्टी के सभी दायित्वों और अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता (साइनिंग अथॉरिटी) के पद से भी हट रही हैं।
गौरतलब है कि चंद्रिमा भट्टाचार्य को महज एक महीने पहले ही टीएमसी का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। लेकिन पदभार संभालने के कुछ ही सप्ताह बाद उनका इस्तीफा पार्टी के भीतर चल रहे असंतोष और राजनीतिक उथल-पुथल का बड़ा संकेत माना जा रहा है।
चंद्रिमा भट्टाचार्य लंबे समय से ममता बनर्जी की सबसे भरोसेमंद नेताओं में गिनी जाती रही हैं। ऐसे में उनका अचानक इस्तीफा पार्टी नेतृत्व के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में उन्हें दमदम उत्तर विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार सौरव सिकदार के हाथों 26 हजार से अधिक मतों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा था।
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यह चुनाव परिणाम टीएमसी के लिए निराशाजनक रहे, जबकि भाजपा ने राज्य में उल्लेखनीय सफलता हासिल की। इसके बाद से पार्टी के भीतर लगातार असंतोष की खबरें सामने आ रही हैं।
चंद्रिमा भट्टाचार्य का इस्तीफा चुनाव के बाद टीएमसी से नेताओं के लगातार हो रहे पलायन की कड़ी में नया घटनाक्रम है। हाल के दिनों में कई वरिष्ठ नेता, सांसद, विधायक और संगठन के पदाधिकारी या तो पार्टी छोड़ चुके हैं या फिर सक्रिय भूमिका से दूरी बना चुके हैं। इससे पार्टी की एकजुटता और नेतृत्व को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में कुछ और नेताओं के भी पार्टी छोड़ने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में ममता बनर्जी के सामने संगठन में विश्वास बहाल करने, कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने और संभावित टूट को रोकने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
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