छत्तीसगढ़ की जेलों में जनवरी 2025 से 31 जनवरी 2026 तक 66 कैदियों की मौत हुई है। राज्य सरकार द्वारा विधानसभा में दी गई इस जानकारी के बाद गुरुवार (26 फरवरी 2026) को सदन में जोरदार हंगामा हुआ। हाल ही में आदिवासी नेता जीवन ठाकुर की न्यायिक हिरासत में हुई मौत को लेकर विपक्षी विधायकों ने सरकार को घेरा।
जीवन ठाकुर का निधन पिछले वर्ष 4 दिसंबर को न्यायिक हिरासत के दौरान तबीयत बिगड़ने के बाद हुआ था। विपक्ष का आरोप है कि उन्हें झूठे मामले में फंसाया गया था और उनकी मृत्यु संदिग्ध परिस्थितियों में हुई।
प्रश्नकाल के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने राज्य की जेलों में पिछले 13 महीनों में हुई हिरासत मौतों की संख्या पर सवाल उठाया। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या इन सभी मामलों में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप न्यायिक जांच पूरी की गई है।
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विपक्षी सदस्यों ने आरोप लगाया कि जेलों में स्वास्थ्य सुविधाएं और निगरानी व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। उन्होंने जीवन ठाकुर की मौत की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की मांग की।
सरकार की ओर से कहा गया कि सभी मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है और आवश्यक जांच प्रक्रियाएं अपनाई गई हैं। हालांकि, विपक्ष ने इस जवाब से असंतोष जताते हुए सदन में नारेबाजी की, जिससे कार्यवाही कुछ समय के लिए बाधित रही।
मामले ने राज्य की जेल व्यवस्था और हिरासत में बंद कैदियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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