गुजरात के कच्छ के विशाल सफेद रेगिस्तान, जिसे कच्छ का रण कहा जाता है, में शिक्षा के क्षेत्र में एक शांत लेकिन महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहा है। यह इलाका अपनी प्राकृतिक सुंदरता और कठिन जीवन परिस्थितियों के लिए जाना जाता है, जहां लंबे समय से नमक उद्योग में काम करने वाले मजदूरों के बच्चे शिक्षा से वंचित रह जाते थे।
इस समस्या को दूर करने के लिए अब ‘क्लासरूम ऑन व्हील्स’ यानी चलती-फिरती कक्षाओं की पहल शुरू की गई है। यह मोबाइल स्कूल बच्चों तक शिक्षा पहुंचाने का एक अनोखा प्रयास है, जो दूर-दराज और अस्थायी बस्तियों में रहने वाले बच्चों को पढ़ाई का अवसर प्रदान कर रहा है।
पहले इन बच्चों को स्कूल तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी या परिवार के साथ पलायन करना पड़ता था, जिसके कारण उनकी पढ़ाई अक्सर बाधित हो जाती थी। लेकिन अब यह मोबाइल कक्षा उनके पास पहुंच रही है, जिससे वे नियमित रूप से शिक्षा प्राप्त कर पा रहे हैं।
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इन चलती-फिरती कक्षाओं में बुनियादी शिक्षा, गणित, भाषा और सामान्य ज्ञान की पढ़ाई कराई जाती है। साथ ही बच्चों को खेल-खेल में सीखने का माहौल भी दिया जाता है, जिससे उनकी रुचि बढ़ती है।
स्थानीय प्रशासन और सामाजिक संगठनों के सहयोग से यह पहल शुरू की गई है, जिसका उद्देश्य हर बच्चे तक शिक्षा पहुंचाना है, चाहे वह किसी भी कठिन परिस्थिति में क्यों न रह रहा हो।
यह प्रयास न केवल शिक्षा को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि कच्छ के रण जैसे दुर्गम क्षेत्र में रहने वाले बच्चों के भविष्य को भी नई दिशा दे रहा है।
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