प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महिला आरक्षण बिल पर लोकसभा में दिए गए संबोधन के बाद कांग्रेस ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रधानमंत्री ने संविधान संशोधन विधेयक (131वां संशोधन) पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए महिला आरक्षण को लागू करने का आह्वान किया, जो लोकसभा में असफल हो गया। इस बिल का उद्देश्य महिलाओं को संसद में आरक्षण देना था, लेकिन भारत राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (INDIA) के दलों ने इससे जुड़े सीमांकन (डेलिमिटेशन) ढांचे के खिलाफ विरोध करते हुए इसका समर्थन करने से इंकार कर दिया।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी का यह संबोधन पूरी तरह से राजनीतिक था और इसका उद्देश्य विपक्षी दलों को निशाना बनाना था। कांग्रेस का आरोप है कि महिला आरक्षण बिल को लेकर सरकार ने कभी ईमानदारी से पहल नहीं की, और यह केवल एक चुनावी रणनीति का हिस्सा था।
कांग्रेस ने प्रधानमंत्री के बयान को झूठा करार दिया और कहा कि जब तक महिला आरक्षण को लेकर कोई ठोस और स्थायी समाधान नहीं आता, तब तक इस तरह के कदम केवल महिला सशक्तिकरण के नाम पर लोगों को भ्रमित करने के प्रयास हैं। प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि मोदी सरकार महिलाओं के अधिकारों को लेकर गंभीर नहीं है और यह सिर्फ दिखावा कर रही है।
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लोकसभा में महिला आरक्षण बिल के असफल होने के बाद कांग्रेस ने कहा कि यह कदम भारतीय राजनीति में महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक और विफलता है।
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