कावेरी जल विवाद को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच एक बार फिर तनाव बढ़ सकता है। कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) ने मंगलवार, 11 अगस्त 2026 को दिल्ली में हुई बैठक में कावेरी जल विनियमन समिति (सीडब्ल्यूआरसी) के निर्देश को मंजूरी दे दी।
सीडब्ल्यूआरसी ने कर्नाटक को निर्देश दिया था कि वह बुधवार से अगले 15 दिनों तक तमिलनाडु के लिए प्रतिदिन 12,000 क्यूसेक कावेरी नदी का पानी छोड़े। सीडब्ल्यूएमए ने समिति के फैसले की पुष्टि करते हुए कर्नाटक को आदेश का पालन सुनिश्चित करने को कहा है।
इस फैसले के अनुसार, 15 दिनों की अवधि में कर्नाटक से तमिलनाडु को बड़ी मात्रा में पानी छोड़ा जाएगा। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 24 घंटे में 11,574 क्यूसेक पानी का प्रवाह लगभग एक हजार मिलियन क्यूबिक फीट (टीएमसी फीट) के बराबर होता है। इस हिसाब से कर्नाटक को करीब 15.55 टीएमसी फीट पानी छोड़ना होगा।
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कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा कि राज्य सरकार पानी की उपलब्धता का सावधानीपूर्वक आकलन करने के बाद आगे की कार्रवाई पर फैसला करेगी। उन्होंने संकेत दिया कि राज्य में मौजूदा जल भंडार और किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जाएगा।
वहीं, कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष ने कहा कि कर्नाटक इस समय आदेश का पालन करने की “संतोषजनक स्थिति” में है। उनके बयान से संकेत मिलता है कि प्राधिकरण को उम्मीद है कि राज्य निर्धारित मात्रा में पानी तमिलनाडु के लिए जारी कर सकेगा।
कावेरी नदी का पानी कर्नाटक और तमिलनाडु दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। सिंचाई और पेयजल जरूरतों को लेकर दोनों राज्यों के बीच लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। ऐसे में सीडब्ल्यूएमए का ताजा निर्देश राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अब सभी की नजर कर्नाटक सरकार के अगले कदम पर है कि वह जल उपलब्धता की समीक्षा के बाद आदेश को किस तरह लागू करती है।
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