जम्मू और कश्मीर सरकार ने डल झील निवासियों के पुनर्वास की ₹416.72 करोड़ की योजना को रद्द कर दिया है। विधानसभा में नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक तनवीर सादिक के सवाल के जवाब में सरकार ने बताया कि यह योजना 17 वर्षों में केवल 27% प्रगति ही हासिल कर सकी।
इस योजना का उद्देश्य डल झील का संरक्षण और पुनरुद्धार करना था, जो दुनियाभर से आने वाले पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण है। यह योजना पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस नेता सोनिया गांधी द्वारा अनुमोदित की गई थी और 2009 में इसे लागू किया गया।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, कुल 9,000 परिवारों में से केवल 1,808 परिवारों का पुनर्वास किया जा सका। इससे स्पष्ट होता है कि योजना अपने लक्ष्यों को पूरा करने में असफल रही। अधिकारियों ने कहा कि अब झील पर रहने वाले बाकी परिवार वहीं रहेंगे और उनके लिए कोई नया स्थानांतरण कार्यक्रम नहीं बनाया जाएगा।
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विशेषज्ञों का मानना है कि डल झील का संरक्षण और पर्यटन संवर्धन अभी भी चुनौतीपूर्ण रहेगा, क्योंकि झील पर रहने वाले परिवार और उनके घर झील के पारिस्थितिकी तंत्र पर असर डालते हैं। सरकार अब स्थानीय समुदाय और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने के लिए नई रणनीति तैयार कर सकती है।
इस निर्णय से स्पष्ट है कि 17 साल बाद भी योजना में अपेक्षित सफलता नहीं मिली और डल झील पर निवास करने वाले परिवारों के पुनर्वास का सपना अधूरा रह गया।
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