दिल्ली के मुंडका-बक्करवाला टोल प्लाजा पर देश की दूसरी मल्टी-लेन फ्री-फ्लो (एमएलएफएफ) टोल प्रणाली शुरू हो गई है। यह अत्याधुनिक बैरियर-फ्री टोल सिस्टम शहरी विस्तार मार्ग-दो (अर्बन एक्सटेंशन रोड-II) पर लागू किया गया है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इसका उद्घाटन किया।
इस नई व्यवस्था के तहत वाहन चालकों को टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं पड़ेगी। एआई यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित कैमरे वाहनों की नंबर प्लेट को 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पर भी पढ़ सकेंगे। इससे यात्रियों का समय बचेगा और ट्रैफिक जाम की समस्या भी कम होगी।
नितिन गडकरी ने कहा कि फास्टैग लागू होने के बाद देश में वार्षिक टोल संग्रह लगभग 40 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 55 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। अब एमएलएफएफ प्रणाली लागू होने से टोल संचालन की लागत 15 प्रतिशत से घटकर करीब 10 प्रतिशत रह जाएगी। इससे सरकार को हर साल लगभग 5,500 करोड़ से 6,000 करोड़ रुपये की बचत होगी।
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नई तकनीक से ईंधन की भी बड़ी बचत होने की उम्मीद है। अधिकारियों के अनुसार, आने वाले वर्षों में करीब 285 करोड़ रुपये का ईंधन बचेगा और लगभग 81 हजार टन कार्बन उत्सर्जन कम होगा।
टोल शुल्क पहले की तरह फास्टैग के माध्यम से स्वतः कटेगा। यदि किसी वाहन का फास्टैग निष्क्रिय होगा या बैलेंस कम होगा, तो संबंधित मोबाइल नंबर पर ई-नोटिस भेजा जाएगा। वाहन मालिक को 72 घंटे के भीतर यूपीआई या अन्य ऑनलाइन माध्यमों से भुगतान करना होगा।
गुजरात के चोरयासी टोल प्लाजा के बाद अब दिल्ली दूसरा शहर बन गया है जहां यह तकनीक लागू हुई है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण वर्ष 2026 तक देशभर के 17 और टोल प्लाजा पर यह प्रणाली शुरू करने की तैयारी कर रहा है।
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