10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन अपेक्षित रूप नहीं ले सका। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन और ‘वोट चोरी’ के आरोपों को लेकर विपक्षी नेताओं की सक्रियता की चर्चा थी, लेकिन कई प्रमुख नेता प्रदर्शन स्थल तक नहीं पहुंच पाए। ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल और राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं की गैरमौजूदगी को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज रहीं। रिपोर्ट के अनुसार, ममता बनर्जी जंतर-मंतर नहीं पहुंचीं, केजरीवाल भी वहां नहीं पहुंचे, जबकि राहुल गांधी चेन्नई रवाना हो गए और अखिलेश यादव सैफई चले गए।
दिल्ली में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था
प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए। खबर के मुताबिक, 30 हजार से अधिक पुलिसकर्मी तैनात थे। विभिन्न रास्तों पर बैरिकेडिंग की गई और सीसीटीवी कैमरों तथा ड्रोन के जरिये निगरानी रखी गई। जंतर-मंतर पहुंचने की कोशिश करने वाले कई प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया।
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कनॉट प्लेस, मिंटो ब्रिज, आकाशवाणी भवन और संसद मार्ग समेत कई संवेदनशील इलाकों में पुलिस की तैनाती रही। प्रदर्शनकारियों के संसद मार्ग, रफी मार्ग, अशोक रोड, रायसीना रोड और इंडिया गेट सर्किल की ओर जुटने की कोशिश करने पर भी पुलिस ने उन्हें रोका।
पथराव की सूचना, कई लोग हिरासत में
रिपोर्ट के अनुसार, बाबा खड़ग सिंह मार्ग के पास पथराव की सूचना मिली। शाम को कनॉट प्लेस के आसपास कुछ प्रदर्शनकारी एकत्र हुए और नारेबाजी करने लगे। इसके बाद पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में लेकर वाहनों से वहां से हटाया।
इस बीच, विपक्षी नेताओं को एहतियातन हिरासत में लिए जाने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। इस संबंध में दायर याचिका पर रविवार को विशेष पीठ सुनवाई करेगी।
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