दिल्ली सरकार ने बिजली सब्सिडी योजना का लाभ लेने वाले उपभोक्ताओं के लिए आधार पहचान अनिवार्य कर दी है। मंगलवार को जारी अधिसूचना के अनुसार, सब्सिडी प्राप्त करने के लिए लाभार्थियों को अपना आधार नंबर देना होगा। यह फैसला सब्सिडी पाने वाले उपभोक्ताओं की बढ़ती संख्या और सरकारी खर्च को देखते हुए लिया गया है।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में बिजली उपभोक्ताओं की संख्या पिछले दस वर्षों में लगभग 40 प्रतिशत बढ़कर 73 लाख से अधिक हो गई है। वित्त वर्ष 2024-25 में करीब 52.3 लाख घरेलू उपभोक्ताओं ने सब्सिडी का लाभ लिया था। 2025-26 में यह संख्या बढ़कर लगभग 55 लाख हो गई, जो घरेलू उपभोक्ताओं का करीब 87 प्रतिशत है।
दिल्ली में योजना के तहत हर महीने 200 यूनिट तक बिजली मुफ्त दी जाती है। वहीं, 201 से 400 यूनिट तक बिजली इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं को 50 प्रतिशत सब्सिडी मिलती है, जिसकी अधिकतम सीमा 800 रुपये प्रतिमाह है।
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सरकारी आंकड़ों के अनुसार, फरवरी 2026 तक बिजली सब्सिडी पर दिल्ली सरकार का आवंटन 4,037.63 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में इस मद के लिए 3,500 करोड़ रुपये रखे गए हैं।
बिजली विभाग की अधिसूचना के अनुसार, योजना को बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड, बीएसईएस यमुना पावर लिमिटेड, टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड, नई दिल्ली नगरपालिका परिषद और सैन्य अभियंता सेवाओं के माध्यम से लागू किया जाएगा।
आधार अधिनियम, 2016 की धारा 7 के तहत लाभार्थियों को सरकारी पोर्टल या निर्धारित माध्यम से आधार नंबर देना होगा। जिन लोगों ने आधार के लिए नामांकन नहीं कराया है, उन्हें आवेदन कर 14 अंकों वाली नामांकन पहचान संख्या जमा करनी होगी। सरकार के अनुसार, इस प्रक्रिया का उद्देश्य पहचान सत्यापन, पारदर्शिता और सब्सिडी वितरण को सरल बनाना है।
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