दिल्ली-एनसीआर में आज से शुरू हुई तीन दिवसीय परिवहन हड़ताल का असर आम लोगों की यात्रा पर पड़ सकता है। ऑटो, टैक्सी, कैब और अन्य व्यावसायिक वाहनों से जुड़ी 68 से अधिक परिवहन यूनियनों और संगठनों ने इस “चक्का जाम” आंदोलन को समर्थन दिया है। यह हड़ताल 21 मई से 23 मई तक चलेगी।
ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (एआईएमटीसी) और यूनाइटेड फ्रंट ऑफ ऑल ट्रांसपोर्ट एसोसिएशंस (यूएफटीए) के बैनर तले दिल्ली-एनसीआर के परिवहन संगठनों ने दिल्ली सरकार और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) की नीतियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू किया है।
यूनियनों का आरोप है कि दिल्ली सरकार ने व्यावसायिक वाहनों पर पर्यावरण क्षतिपूर्ति सेस में अनुचित बढ़ोतरी की है। इसके विरोध में ट्रांसपोर्ट संगठनों ने अपनी सेवाएं तीन दिनों के लिए बंद रखने का फैसला लिया है। एआईएमटीसी ने मंगलवार को नई दिल्ली में बैठक कर इस मुद्दे पर चर्चा की थी।
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यूनियन नेताओं ने मांग की है कि दिल्ली आने वाले सभी मालवाहक वाहनों पर बढ़ाया गया सेस वापस लिया जाए। इसके साथ ही 1 नवंबर 2026 से गैर-दिल्ली पंजीकृत बीएस-IV व्यावसायिक मालवाहक वाहनों के प्रवेश पर प्रस्तावित प्रतिबंध को भी तुरंत रद्द किया जाए।
परिवहन संगठनों का कहना है कि सरकार का यह फैसला वैज्ञानिक और कानूनी आधार पर सही नहीं है, क्योंकि बीएस-IV वाहनों की वैध परिचालन अवधि को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने यह भी मांग की कि केवल उन वाहनों पर सेस लगाया जाए जो दिल्ली को ट्रांजिट कॉरिडोर के रूप में इस्तेमाल करते हैं।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने हाल ही में प्रदूषण नियंत्रण योजना के तहत 1 नवंबर से सभी अंतरराज्यीय बीएस-IV मालवाहक वाहनों के दिल्ली प्रवेश पर प्रतिबंध की घोषणा की थी। हालांकि सीएनजी, इलेक्ट्रिक और बीएस-VI वाहनों को इससे छूट दी गई है।
हड़ताल को करीब 4 लाख पंजीकृत टैक्सी मालिकों का समर्थन मिलने की संभावना है। यूनियनों ने चेतावनी दी है कि यदि अगले दो सप्ताह में टैक्सी किराए बढ़ाने का नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
इस हड़ताल के कारण उबर और ओला जैसी ऐप आधारित कैब सेवाएं, व्यावसायिक टैक्सी संचालन और पीक ऑवर की लोकल कनेक्टिविटी प्रभावित हो सकती है। हालांकि दिल्ली ऑटो रिक्शा संघ ने खुद को इस हड़ताल से अलग बताते हुए कहा है कि रेलवे स्टेशन, बस अड्डों और अन्य स्थानों पर ऑटो सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहेंगी।
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