नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर हालिया प्रदर्शन के दौरान महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित मारपीट के आरोपों को दिल्ली पुलिस ने खारिज किया है। पुलिस ने सोशल मीडिया पर किए जा रहे ऐसे दावों को निराधार और भ्रामक बताया है। नई दिल्ली के पुलिस उपायुक्त सचिन शर्मा ने कहा कि महिला प्रदर्शनकारियों को महिला पुलिसकर्मियों ने ही संभाला और उनके साथ निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सम्मानजनक व्यवहार किया गया।
सचिन शर्मा ने कहा कि कुछ सोशल मीडिया हैंडल महिला प्रदर्शनकारियों के साथ शारीरिक मारपीट किए जाने का दावा कर रहे हैं। उन्होंने इन आरोपों को वास्तविक घटनाक्रम से अलग बताया। पुलिस के मुताबिक, महिला प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा और उन्हें संभालने के लिए महिला कर्मचारियों की तैनाती की गई थी।
पुरुष प्रदर्शनकारियों को लेकर डीसीपी ने कहा कि जिन लोगों को हिरासत में लिया गया था, उन्हें कानून की निर्धारित प्रक्रिया के तहत तय समय के भीतर रिहा कर दिया गया। उन्होंने कहा कि इसके विपरीत कोई भी दावा तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है और घटनाओं के वास्तविक क्रम को नहीं दर्शाता।
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यह विवाद चुनाव आयोग के खिलाफ जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के बाद सामने आया। प्रदर्शन के दौरान तीन महिला पत्रकारों ने दिल्ली पुलिस के अधिकारियों पर कथित यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। मामले को लेकर पुलिस की कार्रवाई और अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए।
इसी बीच दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन कवर करने वाले पत्रकारों के लिए एक सलाह भी जारी की है। पुलिस ने पत्रकारों से अपने संबंधित संस्थानों द्वारा जारी वैध पहचान पत्र या वैध पीआईबी/डीआईपी मान्यता कार्ड साथ रखने और उसे प्रदर्शन स्थल पर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करने को कहा है।
पुलिस के अनुसार, इस व्यवस्था का उद्देश्य प्रदर्शन स्थलों पर पत्रकारों की पहचान आसानी से सुनिश्चित करना है। साथ ही, पत्रकारों से कहा गया है कि उनकी मौजूदगी या गतिविधियों से पुलिस की कार्रवाई अथवा सुरक्षा कर्मियों की आवाजाही बाधित नहीं होनी चाहिए।
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