दिल्ली पुलिस ने बुधवार को बस में कथित मारपीट की घटना के संबंध में भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) की महिला कार्यकर्ताओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। पुलिस मामले की आगे जांच कर रही है।
यह कार्रवाई मंगलवार को एनएसयूआई द्वारा कनॉट प्लेस थाने के बाहर धरना देने के बाद हुई। संगठन ने आरोप लगाया था कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अचानक किए गए प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों ने महिला कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की। एनएसयूआई के मुताबिक, कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर थाने पहुंचाया गया था और कुछ कार्यकर्ताओं की रिहाई लंबित थी।
सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो में कथित तौर पर एक महिला पुलिसकर्मी को एनएसयूआई की महिला सदस्य को बालों से पकड़कर बस में खींचते हुए दिखाया गया है। इसी बस में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले जाया जा रहा था।
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एनएसयूआई ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर कथित व्यवहार की निंदा करते हुए कहा कि लोकतंत्र और अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाले छात्रों के साथ अमानवीय व्यवहार किया गया। संगठन ने कहा कि लाठी और दमन से आवाज दबाई जा सकती है, लेकिन हौसला नहीं।
इससे पहले, संगठन ने कनॉट प्लेस स्थित राजीव चौक मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर सात पर प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारी कथित चुनावी अनियमितताओं को लेकर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ सहित सैकड़ों कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने का दावा किया गया। संगठन के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी रवि हनुमान पांडे ने कहा कि कथित ‘वोट चोरी’ के खिलाफ आंदोलन जारी रहेगा।
इस बीच, दिल्ली पुलिस ने दिल्ली हाईकोर्ट में दायर उस याचिका की स्वीकार्यता पर सवाल उठाए, जिसमें 10 अक्टूबर के प्रदर्शनों के दौरान कथित हमलों की स्वतंत्र जांच की मांग की गई थी। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कहा कि याचिकाकर्ता ने 2010 के जनहित याचिका नियमों के नियम 9(F) और 9(G) का पालन नहीं किया।
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