राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के मध्य क्षेत्र में स्थित उद्योग भवन के पास मजदूरों की एक अस्थायी बस्ती में भीषण आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि मौके पर बड़े स्तर पर राहत एवं बचाव अभियान चलाना पड़ा। आग बुझाने के लिए करीब 25 दमकल वाहनों और कई विशेष इकाइयों को तैनात किया गया।
जानकारी के अनुसार, आग उस श्रमिक शिविर में लगी जहां सेंट्रल विस्टा परियोजना से जुड़े मजदूर रहते थे। प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट को आग लगने की संभावित वजह माना जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, बस्ती में मौजूद छोटे एलपीजी सिलेंडरों और व्यावसायिक गैस सिलेंडरों में हुए विस्फोटों ने आग को और भड़का दिया, जिससे लपटें तेजी से पूरी बस्ती में फैल गईं।
दिल्ली अग्निशमन सेवा (डीएफएस) के अधिकारियों ने बताया कि सुबह लगभग 3:02 बजे आग लगने की सूचना मिली थी। दमकल की गाड़ियां कुछ ही मिनटों में मौके पर पहुंच गईं, लेकिन आग की गंभीरता को देखते हुए इसे सुबह 3:24 बजे ‘मेक-4’ श्रेणी में अपग्रेड कर दिया गया।
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अग्निशमन विभाग ने आग पर काबू पाने के लिए पानी के टैंकर, फायर बाइक और अतिरिक्त जल वाहनों को तैनात किया। अभियान के चरम पर लगभग 20 अग्निशमन इकाइयां लगातार आग बुझाने में जुटी रहीं।
फायर अधिकारी संदीप दुग्गल ने बताया कि प्रभावित क्षेत्र सेना भवन और उद्योग भवन के पास मजदूरों के लिए बनाई गई अस्थायी झुग्गी-बस्ती थी। उन्होंने कहा कि बस्ती में छोटे एलपीजी सिलेंडरों का उपयोग किया जा रहा था और बिजली की तारें भी चारों ओर फैली हुई थीं। ऐसे में आग लगने के सटीक कारण का तत्काल पता लगाना मुश्किल था।
लगभग तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद दमकल कर्मियों ने आग पर नियंत्रण पाया। बार-बार हो रहे सिलेंडर विस्फोट और अस्थायी ढांचों की घनी बसावट के कारण अभियान काफी चुनौतीपूर्ण रहा।
फिलहाल आग लगने के सटीक कारणों और नुकसान का आकलन किया जा रहा है। घटना में किसी के हताहत या घायल होने की तत्काल जानकारी नहीं मिली है। अधिकारियों ने बताया कि कूलिंग ऑपरेशन पूरा होने के बाद विस्तृत जांच की जाएगी।
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