दिल्ली में सोमवार से यमुना नदी पर पहली बार क्रूज सेवा का सॉफ्ट लॉन्च शुरू हुआ। दिल्ली सरकार ने 'नमो यमुना - रिवर सफारी' सेवा के ट्रायल रन की शुरुआत की है। इस पर्यावरण-अनुकूल पहल का मकसद राजधानी के निवासियों और पर्यटकों को नदी के रास्ते शहर के क्षितिज और विरासत को देखने का नया अनुभव देना है।
यह परियोजना यमुना के एक हिस्से को मनोरंजन गलियारे में बदलने की दिशा में भी एक कदम है, जिसमें स्थिरता और मनोरंजन दोनों को जोड़ा गया है। यह फेरी सफारी सोनिया विहार से जगतपुर तक कुल 5 किलोमीटर की दूरी तय करेगी और प्रत्येक सवारी करीब 40 मिनट की होगी। किराया प्रति व्यक्ति 500 रुपये तय किया गया है, जबकि प्रत्येक क्रूज में अधिकतम 30 यात्री सवार हो सकेंगे। मिली जानकारी के अनुसार, औपचारिक उद्घाटन से पहले यह सेवा चार से पांच दिनों तक ट्रायल रन के दौर से गुजरेगी। यह पहल दिल्ली में नदी-आधारित पर्यटन को विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
यह योजना राजधानी में अंतर्देशीय जलमार्ग परिवहन और नदी-आधारित पर्यटन को बढ़ावा देने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है। यमुना नदी को राष्ट्रीय जलमार्ग 110 (एनडब्ल्यू-110) के रूप में अधिसूचित किया गया है, जो दिल्ली के जगतपुर से उत्तर प्रदेश के प्रयागराज तक 1,080 किलोमीटर लंबा है। बंदरगाह, नौवहन और जलमार्ग मंत्रालय सोनिया विहार और जगतपुर के बीच 6-7 किलोमीटर के राउंड-ट्रिप गलियारे पर अंतर्देशीय जल परिवहन और लघु-दूरी के शहरी पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सुविधाएं विकसित कर रहा है।
और पढ़ें: ब्राज़ील चुनाव: लूला दा सिल्वा की जीत पर दुनियाभर के नेताओं ने दी बधाई, बोल्सोनारो ने नतीजे मानने से किया इनकार
इस परियोजना को समर्थन देने के लिए भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) ने दिल्ली सरकार के प्रमुख विभागों के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं, जिनमें सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग, दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए), दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) और दिल्ली पर्यटन एवं परिवहन विकास निगम (डीटीटीडीसी) शामिल हैं। यह समझौता एनडब्ल्यू-110 के चार किलोमीटर के हिस्से में क्रूज पर्यटन विकसित करने पर केंद्रित है।
प्रस्तावित गलियारा पर्यावरण-अनुकूल क्रूज संचालन के केंद्र के रूप में काम करेगा, जहां इलेक्ट्रिक-सोलर हाइब्रिड नावें चलाई जाएंगी, जिनमें 30 से 40 यात्री सवार हो सकेंगे। इन नावों में लाइफ जैकेट और पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम जैसी सुरक्षा सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी। अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना से मनोरंजक गतिविधियों को नई जान मिलने के साथ-साथ हरित गतिशीलता को बढ़ावा मिलेगा और दिल्ली के पर्यटन विकल्पों का विस्तार होगा, जिससे निवासियों और पर्यटकों को नदी-आधारित नए अनुभव मिल सकेंगे।
और पढ़ें: अमेरिकी सेना का दावा: खाड़ी देशों के 1.5 अरब बैरल तेल निर्यात में की मदद, होर्मुज जलडमरूमध्य से गुज़रे 3,000 से अधिक जहाज़