झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के खिलाफ लंबे समय से आंदोलन कर रहे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द किए जाने की घोषणा के बाद अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी। राज्य सरकार ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा और टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) के माध्यम से कराई गई सभी भर्ती प्रक्रियाओं को रद्द करने का फैसला किया है।
महतो ने सरकार के निर्णय का स्वागत किया, लेकिन स्पष्ट किया कि भूख हड़ताल खत्म होने का मतलब छात्रों का व्यापक आंदोलन समाप्त होना नहीं है। उन्होंने कहा कि छात्र परीक्षा प्रणाली में सुधार और भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।
महतो ने कहा कि छात्र सरकार की जांच में सहयोग करेंगे, लेकिन केवल जांच से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। उन्होंने ऐसी व्यवस्था बनाने की मांग की, जिसमें भविष्य में पेपर लीक और परीक्षा में किसी भी तरह की गड़बड़ी की संभावना न रहे। उनके अनुसार, कई बार सीबीआई या सीआईडी जांच की घोषणा हुई, लेकिन बाद में उन्हें रोक दिया गया। इसलिए छात्रों को ऐसी मजबूत व्यवस्था चाहिए, जिसकी सरकार गारंटी दे।
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‘मांगें पूरी हुईं, लेकिन लड़ाई अभी बाकी’
महतो ने कहा कि जिन अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों ने आंदोलन किया था, उन पर कार्रवाई जरूर हुई है, लेकिन छात्र अभी पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा और भर्ती व्यवस्था में व्यापक सुधार के लिए लंबी लड़ाई अभी बाकी है।
उन्होंने आंदोलन के दौरान छात्रों, अभिभावकों, मीडिया, पुलिस और प्रशासन के सहयोग के लिए आभार जताया। महतो ने कहा कि आंदोलन की अगली रणनीति छात्रों और आंदोलन के सदस्यों के साथ बैठक के बाद तय की जाएगी।
हेमंत सोरेन ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार को मंत्रिमंडल की बैठक के बाद जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करने की घोषणा की। उन्होंने 2014 से टीडीपीएल द्वारा कराई गई सभी परीक्षाओं, उनके परिणामों और संबंधित चयन प्रक्रियाओं को भी रद्द करने की बात कही।
सोरेन ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में एक समिति गठित करने की घोषणा की। यह समिति भर्ती परीक्षाओं में सुधार के लिए सुझाव देगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य ऐसी पारदर्शी व्यवस्था तैयार करना है, जिससे भविष्य में परीक्षा संबंधी अनियमितताओं को रोका जा सके।
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