कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मंगलवार को घोषणा की कि वह राज्यसभा के लिए तीसरा कार्यकाल नहीं मांगेंगे। उनका वर्तमान छह वर्षीय कार्यकाल 9 अप्रैल 2026 को समाप्त हो रहा है। दिग्विजय सिंह का यह फैसला ऐसे समय सामने आया है, जब मध्य प्रदेश कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने उनसे राज्यसभा सीट अनुसूचित जाति समुदाय के किसी प्रतिनिधि के लिए छोड़ने का अनुरोध किया था।
मंगलवार (13 जनवरी 2026) को प्रदीप अहिरवार ने दिग्विजय सिंह को एक पत्र लिखकर आग्रह किया कि इस बार राज्यसभा में अनुसूचित जाति समुदाय से किसी प्रतिनिधि को भेजा जाए। पत्र में उन्होंने कहा कि इससे सामाजिक संतुलन और संवैधानिक मूल्यों को मजबूती मिलेगी, साथ ही दलित समुदाय के आत्मसम्मान और राजनीतिक भागीदारी को भी बढ़ावा मिलेगा।
पत्र के संदर्भ में पूछे गए सवाल पर दिग्विजय सिंह ने पत्रकारों से कहा, “यह मेरे हाथ में नहीं है, लेकिन मैं इतना ही कहना चाहूंगा कि मैं अपनी सीट खाली कर रहा हूं।” उनके इस बयान को पार्टी के भीतर सामाजिक प्रतिनिधित्व को प्राथमिकता देने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
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दिग्विजय सिंह वर्ष 2014 से राज्यसभा सांसद हैं। इससे पहले वह 2019 और 2024 में लोकसभा चुनाव हार चुके हैं। उन्होंने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में 1993 से 1998 और फिर 1998 से 2003 तक लगातार दो कार्यकाल पूरे किए।
2003 में कांग्रेस की राज्य में सत्ता जाने के बाद दिग्विजय सिंह ने 10 वर्षों तक चुनाव न लड़ने की घोषणा की थी। इसके बाद उन्होंने 2013 में सक्रिय राजनीति में वापसी की और 2014 में राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए। अब उनके इस फैसले को कांग्रेस में सामाजिक न्याय और प्रतिनिधित्व की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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