मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के एक शांत गांव से सामने आई यह घटना इंसान और जानवर के बीच अटूट रिश्ते की मिसाल बन गई है। यहां एक पालतू कुत्ते ने अपने मालिक की मौत के बाद भी उसका साथ छोड़ने से इनकार कर दिया। रात भर शव के पास बैठकर पहरा देने से लेकर अंतिम संस्कार तक, कुत्ते की मौजूदगी ने हर किसी की आंखें नम कर दीं।
40 वर्षीय जगदीश प्रजापति सोमवार को अपने घर में फंदे पर लटके पाए गए। जब परिजन इस दुखद घटना की जानकारी मिलने पर घर पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि उनका पालतू कुत्ता शव के पास चुपचाप बैठा हुआ है। पूरी रात कुत्ता वहीं बैठा रहा। न रोना, न भौंकना, न बेचैनी—बस अपने मालिक के पास एक शांत प्रहरी की तरह मौजूद रहा।
अगली सुबह जब शव को पोस्टमार्टम के लिए करेरा ले जाया गया, तो कुत्ता ट्रैक्टर-ट्रॉली के पीछे करीब चार किलोमीटर तक दौड़ता रहा। गांव वालों ने देखा कि वह पूरी ताकत से वाहन के पीछे भाग रहा था, मानो किसी भी कीमत पर अपने मालिक से अलग नहीं होना चाहता हो। बाद में परिजनों ने उसे ट्रॉली पर बैठा लिया।
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पोस्टमार्टम हाउस में भी कुत्ता वहीं रुका रहा। सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद जब शव वापस गांव लाया गया, तो कुत्ता भी साथ लौटा। श्मशान घाट में अंतिम संस्कार के दौरान वह चिता के पास बैठा रहा। उसने न कुछ खाया, न पानी पिया और किसी को भी उसे वहां से हटाने नहीं दिया।
यह दृश्य देखकर पुलिसकर्मी तक भावुक हो गए। थाना प्रभारी ने कुत्ते की वफादारी की सराहना की है।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि जगदीश ने आत्महत्या क्यों की। पुलिस ने मामला दर्ज कर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी कर ली है। लेकिन गांव वालों के दिलों में जो बात रह गई, वह कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक कुत्ते की निःशब्द, अटूट और सच्ची वफादारी की याद है—जो आखिरी चिंगारी बुझने तक अपने इंसान के पास बैठा रहा।
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