केंद्र सरकार ने कीटनाशकों के सुरक्षित और प्रभावी उपयोग को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से तैयार किए गए पेस्टिसाइड्स मैनेजमेंट बिल के मसौदे पर जनता से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं। यह प्रस्तावित विधेयक वर्ष 1968 के कीटनाशक अधिनियम (Insecticides Act) को निरस्त करने का लक्ष्य रखता है और देश में कीटनाशकों के नियमन के लिए एक आधुनिक और व्यापक ढांचा प्रदान करता है।
केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अनुसार, इस नए विधेयक का उद्देश्य कीटनाशकों के निर्माण, आयात, पैकेजिंग, लेबलिंग, भंडारण, विज्ञापन, बिक्री, परिवहन, वितरण, उपयोग और निपटान को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करना है, ताकि किसानों और उपभोक्ताओं को सुरक्षित और प्रभावी कीटनाशक उपलब्ध कराए जा सकें। मसौदे में स्पष्ट किया गया है कि कीटनाशकों के उपयोग से मानव स्वास्थ्य, पशुओं, कीटों के अलावा अन्य जीवों और पर्यावरण पर पड़ने वाले जोखिम को न्यूनतम किया जाना चाहिए।
विधेयक का एक प्रमुख उद्देश्य ऐसे कीटनाशकों को बढ़ावा देना है जो जैविक (बायोलॉजिकल) हों और पारंपरिक ज्ञान पर आधारित हों। इससे रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि यह कदम न केवल पर्यावरण संरक्षण में सहायक होगा, बल्कि किसानों और उपभोक्ताओं की सेहत के लिए भी लाभकारी सिद्ध होगा।
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मसौदा विधेयक में यह भी प्रस्तावित है कि नियमों का उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिससे नकली, प्रतिबंधित या खतरनाक कीटनाशकों की बिक्री और उपयोग पर रोक लगाई जा सके। इसके साथ ही, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए निगरानी और अनुपालन तंत्र को मजबूत करने की बात कही गई है।
कृषि मंत्रालय ने नागरिकों, विशेषज्ञों, किसानों और संबंधित हितधारकों से अपील की है कि वे इस मसौदे का अध्ययन कर अपने सुझाव दें, ताकि अंतिम कानून को अधिक प्रभावी, व्यावहारिक और जनहितकारी बनाया जा सके।
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