भारत ने अपनी नौसैनिक लॉजिस्टिक्स क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए स्वदेशी एयर-ड्रॉपेबल कंटेनर (ADC-150) का सफल परीक्षण किया है। इस परीक्षण को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और भारतीय नौसेना ने संयुक्त रूप से पूरा किया।
अधिकारियों के अनुसार, इस प्रणाली के चार सफल इन-फ्लाइट रिलीज़ परीक्षण किए गए। इन परीक्षणों में बोइंग पी-8आई पोसाइडन विमान से कंटेनर को हवा में छोड़कर उसकी क्षमता का आकलन किया गया। परीक्षण 21 फरवरी से 1 मार्च 2026 के बीच गोवा के तट के पास किए गए।
इन ट्रायल्स को विभिन्न कठिन परिस्थितियों में अंजाम दिया गया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह प्रणाली अलग-अलग परिचालन स्थितियों में भी भरोसेमंद तरीके से काम कर सके।
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ADC-150 को विशेष रूप से समुद्र में आपातकालीन सहायता पहुंचाने के लिए विकसित किया गया है। इस कंटेनर के माध्यम से लगभग 150 किलोग्राम तक जरूरी सामान समुद्र में मौजूद जहाजों तक पहुंचाया जा सकता है। इसमें मेडिकल सामग्री, आपातकालीन उपकरण और अन्य महत्वपूर्ण आपूर्ति शामिल हो सकती है।
अधिकारियों का कहना है कि यह प्रणाली उन नौसैनिक जहाजों के लिए बेहद उपयोगी होगी जो तट से काफी दूर तैनात रहते हैं और अचानक किसी आपात स्थिति का सामना करते हैं।
इस परियोजना में डीआरडीओ के कई अनुसंधान केंद्रों ने योगदान दिया। विशाखापट्टनम स्थित नेवल साइंस एंड टेक्नोलॉजिकल लेबोरेटरी इस परियोजना की प्रमुख प्रयोगशाला रही। पैराशूट प्रणाली को आगरा स्थित एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट ने विकसित किया, जबकि उड़ान प्रमाणन बेंगलुरु के सेंटर फॉर मिलिट्री एयरवर्थिनेस एंड सर्टिफिकेशन ने दिया।
परीक्षण के दौरान उपकरण संबंधी सहायता हैदराबाद की डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरी ने प्रदान की। सभी परीक्षण सफल रहने के बाद उम्मीद है कि इस प्रणाली को जल्द ही भारतीय नौसेना की सेवा में शामिल किया जाएगा।
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