भारत ने हाइपरसोनिक हथियार प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने सक्रिय रूप से ठंडे किए गए, पूर्ण आकार के स्क्रैमजेट इंजन का लंबी अवधि का सफल जमीनी परीक्षण किया है। यह परीक्षण हैदराबाद स्थित रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला (डीआरडीएल) की स्क्रैमजेट कनेक्ट पाइप टेस्ट (एससीपीटी) सुविधा में किया गया, जहां इंजन ने 12 मिनट से अधिक समय तक सफलतापूर्वक संचालन किया।
यह उपलब्धि 25 अप्रैल 2025 को किए गए उप-आकार के लंबे समय वाले परीक्षण पर आधारित है और इसे भारत के हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस परियोजना में उपयोग किए गए दहन कक्ष (कम्बस्टर) और परीक्षण सुविधा दोनों का डिजाइन और विकास डीआरडीएल द्वारा किया गया, जिसे उद्योग जगत के साझेदारों का सहयोग मिला।
अधिकारियों के अनुसार, इस सफल परीक्षण के साथ भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है, जिनके पास उन्नत हाइपरसोनिक क्षमताएं हैं। हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइलें मैक-5 से अधिक की गति, यानी लगभग 6,100 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा रफ्तार, बनाए रखने में सक्षम होती हैं। ये मिसाइलें एयर-ब्रीदिंग इंजन पर आधारित होती हैं, जो सुपरसोनिक दहन प्रक्रिया के माध्यम से लंबी दूरी तक निरंतर उड़ान संभव बनाती हैं।
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हालिया परीक्षण में न केवल स्क्रैमजेट इंजन के दहन कक्ष के डिजाइन को सफलतापूर्वक सत्यापित किया गया, बल्कि एससीपीटी परीक्षण सुविधा की तकनीकी क्षमता भी प्रदर्शित हुई। यह सुविधा भविष्य में हाइपरसोनिक प्रणालियों के और उन्नत परीक्षणों के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि पर डीआरडीओ, उद्योग साझेदारों और शिक्षाविदों को बधाई दी। उन्होंने इसे भारत की हाइपरसोनिक मिसाइल महत्वाकांक्षाओं के लिए “मजबूत आधार” बताया। वहीं, डीआरडीओ के अध्यक्ष और रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव डॉ. समीर वी. कामत ने भी परीक्षण से जुड़े सभी वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की सराहना की।
यह सफलता न केवल भारत की रक्षा क्षमताओं को नई ऊंचाई देती है, बल्कि स्वदेशी उन्नत तकनीकों के विकास में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और अहम कदम मानी जा रही है।
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