राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए), देहरादून की पासिंग आउट परेड में नौ महिला कैडेटों की भागीदारी को अकादमी के इतिहास का एक ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल आईएमए के लिए ही नहीं, बल्कि भारतीय सशस्त्र बलों और देश में महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
परेड को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा, "मुझे विशेष रूप से नौ महिला कैडेटों को देखकर बेहद खुशी हो रही है। यह आईएमए के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होने वाला क्षण है।" उन्होंने कहा कि महिलाओं की बढ़ती भागीदारी भारतीय सेना को और अधिक समावेशी, आधुनिक और मजबूत बनाएगी।
राष्ट्रपति ने पासिंग आउट परेड में शामिल सभी कैडेटों को उनकी कठिन प्रशिक्षण यात्रा पूरी करने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि सैन्य जीवन केवल एक पेशा नहीं, बल्कि राष्ट्र सेवा का सर्वोच्च माध्यम है। उन्होंने युवा अधिकारियों से देश की सुरक्षा, अनुशासन और सैन्य मूल्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया।
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उन्होंने कहा कि भारतीय सेना हमेशा साहस, समर्पण और बलिदान की मिसाल रही है। नए अधिकारियों को इन आदर्शों को आगे बढ़ाते हुए देश की संप्रभुता और अखंडता की रक्षा के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए।
राष्ट्रपति मुर्मू ने यह भी कहा कि भारतीय सेना में महिलाओं की भूमिका लगातार बढ़ रही है और विभिन्न क्षेत्रों में उनकी भागीदारी नई ऊंचाइयों तक पहुंच रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि ये महिला कैडेट भविष्य में सेना के लिए प्रेरणादायक नेतृत्व का उदाहरण प्रस्तुत करेंगी।
आईएमए की इस पासिंग आउट परेड को भारतीय सैन्य इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। नौ महिला कैडेटों का प्रशिक्षण पूरा कर अधिकारी बनना सेना में लैंगिक समानता और महिला नेतृत्व को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
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