दिल्ली के द्वारका सड़क हादसा मामले में सोमवार को अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। द्वारका अदालत ने नाबालिग चालक को दी गई जमानत के खिलाफ दायर अपील को खारिज कर दिया है। यह अपील मृतक की मां की ओर से दायर की गई थी, जिन्होंने जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (जेजेबी) द्वारा 10 मार्च को दी गई जमानत को चुनौती दी थी।
मामले के अनुसार, यह दुर्घटना एक नाबालिग चालक द्वारा वाहन चलाने के दौरान हुई थी, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। इसके बाद जेजेबी ने 10 मार्च को नाबालिग को जमानत दे दी थी। इस निर्णय से असंतुष्ट होकर मृतक की मां ने द्वारका अदालत में अपील दायर की थी।
सुनवाई के दौरान अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनीं और जेजेबी के आदेश का अध्ययन किया। अदालत ने पाया कि जमानत देने का निर्णय कानून के दायरे में लिया गया था और उसमें किसी प्रकार की कानूनी त्रुटि नहीं है।
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अदालत ने स्पष्ट किया कि किशोर न्याय प्रणाली का उद्देश्य नाबालिगों के सुधार और पुनर्वास पर केंद्रित होता है, न कि उन्हें कठोर दंड देने पर। इसी आधार पर जेजेबी के फैसले को सही ठहराते हुए अपील को खारिज कर दिया गया।
मृतक की मां ने आरोप लगाया था कि नाबालिग को जमानत देना न्याय के खिलाफ है, लेकिन अदालत ने कहा कि कानून के तहत जेजेबी के पास ऐसे मामलों में निर्णय लेने का अधिकार होता है।
यह फैसला किशोर न्याय प्रणाली और सड़क दुर्घटनाओं से जुड़े मामलों में कानूनी प्रक्रिया को लेकर एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।
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