चुनाव आयोग ने गुरुवार को 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसएसआर) का निर्देश दिया। इस प्रक्रिया के लिए 1 जनवरी 2027 को पात्रता की निर्धारित तारीख रखा गया है। इसका उद्देश्य पात्र नागरिकों, विशेषकर युवाओं और पहली बार मतदान करने वाले लोगों के नाम मतदाता सूची में शामिल करना, मौजूदा प्रविष्टियों की गलतियां सुधारना और सूची की सटीकता बढ़ाना है।
आयोग के मुताबिक, यह प्रक्रिया अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, लक्षद्वीप, मध्य प्रदेश, मणिपुर, पुडुचेरी, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल में आयोजित की जाएगी। जिन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) जारी है या हाल में पूरा हुआ है, वहां एसएसआर का कार्यक्रम बाद में घोषित किया जाएगा।
अधिकारियों को पर्याप्त संसाधन देने का निर्देश
चुनाव आयोग ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों से मतदाता सूची संशोधन में शामिल अधिकारियों को पर्याप्त कर्मचारी और संसाधन उपलब्ध कराने को कहा है। इनमें मुख्य निर्वाचन अधिकारी, जिला निर्वाचन अधिकारी, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी, सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी, बूथ स्तरीय पर्यवेक्षक और बूथ स्तरीय अधिकारी शामिल हैं।
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आयोग ने स्पष्ट किया कि संबंधित विधानसभा क्षेत्र के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी की जिम्मेदारी होगी कि कोई पात्र नागरिक मतदाता सूची से छूटे नहीं और किसी अपात्र व्यक्ति का नाम शामिल न हो।
नवंबर से शुरू होगी दावा-आपत्ति प्रक्रिया
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, मतदान केंद्रों का युक्तिकरण और पुनर्व्यवस्थापन 2 नवंबर 2026 तक पूरा किया जाएगा। इसके बाद 12 नवंबर को एकीकृत प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित होगी। मतदाता 12 नवंबर से 11 दिसंबर तक सूची पर दावे और आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे। इनका निपटारा 28 दिसंबर तक पूरा करने का लक्ष्य है। अंतिम मतदाता सूची 4 जनवरी 2027 को प्रकाशित की जाएगी।
एसआईआर विवाद के बीच अहम फैसला
यह घोषणा ऐसे समय हुई है, जब एसआईआर को लेकर देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। विपक्षी दलों ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और फॉर्म-6 के साथ अतिरिक्त घोषणा-पत्र जमा कराने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने भी राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन के अन्य नेताओं की याचिका पर चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी को नोटिस जारी किया है। उत्तर प्रदेश, पंजाब, गोवा, मणिपुर और उत्तराखंड जैसे राज्यों में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं, इसलिए मतदाता सूची का संशोधन विशेष महत्व रखता है।
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