प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अल-फलाह समूह के प्रमुख जवाद अहमद सिद्दीकी और अन्य आरोपियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 54 एकड़ भूमि और उस पर बने भवनों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है। इन संपत्तियों की कुल अनुमानित कीमत लगभग ₹139.97 करोड़ बताई गई है। इसके साथ ही ईडी ने इस मामले में अभियोजन शिकायत यानी चार्जशीट भी दाखिल कर दी है। एजेंसी के अनुसार, इस पूरे मामले में कथित अपराध से अर्जित कुल आय ₹493.24 करोड़ आंकी गई है।
यह मामला अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट, अल-फलाह यूनिवर्सिटी और उससे जुड़ी अन्य शैक्षणिक संस्थाओं और इकाइयों से संबंधित है। ईडी का आरोप है कि इन संस्थानों के माध्यम से अवैध रूप से धन अर्जित किया गया और बाद में उसे मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए वैध दिखाने की कोशिश की गई। जांच एजेंसी का कहना है कि छात्रों के साथ धोखाधड़ी कर उनसे भारी रकम वसूली गई और उसी धन का इस्तेमाल संपत्तियां बनाने और अन्य गतिविधियों में किया गया।
जवाद अहमद सिद्दीकी को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में 18 नवंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था। फिलहाल वह न्यायिक हिरासत में हैं। ईडी की जांच में सामने आया है कि ट्रस्ट और विश्वविद्यालय से जुड़े कई खातों और लेनदेन के जरिए धन को इधर-उधर किया गया, जिससे अवैध कमाई को छिपाया जा सके।
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ईडी ने कहा है कि मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत की गई इस कार्रवाई का उद्देश्य अपराध से अर्जित संपत्तियों को जब्त कर भविष्य में उनकी कुर्की सुनिश्चित करना है। एजेंसी आगे की जांच में अन्य आरोपियों और संभावित संपत्तियों की भी पहचान कर रही है। इस कार्रवाई से शिक्षा क्षेत्र में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
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