अर्जेंटीना के खिलाफ फीफा विश्व कप के राउंड ऑफ 16 मुकाबले में 3-2 से मिली हार के बाद मिस्र फुटबॉल संघ (ईएफए) ने मैच में हुई रेफरिंग पर गंभीर सवाल उठाए हैं। संघ ने कहा कि वह इस मामले पर "चुप नहीं रह सकता" क्योंकि उसे लगता है कि मुकाबले में फैसले निष्पक्ष नहीं थे।
मिस्र के कोच होसाम हसन और कई खिलाड़ियों ने भी मैच के दौरान हुई रेफरिंग को लेकर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि अर्जेंटीना ने 13 मिनट के अंदर लगातार तीन गोल कर ऐतिहासिक वापसी की, लेकिन इस दौरान कई फैसलों ने मैच की दिशा बदल दी।
ईएफए ने अपने बयान में कहा कि मिस्र की राष्ट्रीय टीम के अधिकारों और हितों की रक्षा करना उसकी जिम्मेदारी है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। संघ ने आरोप लगाया कि रेफरी ने वीएआर (वीडियो असिस्टेंट रेफरी) प्रणाली का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं किया, जिसके कारण मिस्र को नुकसान उठाना पड़ा।
और पढ़ें: सुकैश चंद्रशेखर की सहयोगी की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस से मांगा जवाब, 200 करोड़ रुपये रंगदारी मामले में चुनौती
मैच के 58वें मिनट में मिस्र ने दूसरा गोल किया था, लेकिन वीएआर समीक्षा के बाद इसे रद्द कर दिया गया। अधिकारियों ने फैसला दिया कि गोल से पहले मरवान अतिया ने अर्जेंटीना के डिफेंडर लिसांद्रो मार्टिनेज के खिलाफ फाउल किया था।
इसके बाद मुस्तफा ज़िको ने नौ मिनट बाद एक और गोल कर मिस्र को 2-0 की बढ़त दिला दी। हालांकि, मैच का रुख तब बदल गया जब लियोनेल मेसी के असिस्ट पर क्रिस्टियन रोमेरो ने 79वें मिनट में अर्जेंटीना का पहला गोल किया। इसके बाद अर्जेंटीना ने लगातार तीन गोल दागकर शानदार वापसी की।
मैच के अंतिम क्षणों में मिस्र के गोलकीपिंग कोच सफान अलसगीर को रेड कार्ड दिखाया गया और कई मिस्र खिलाड़ियों को येलो कार्ड मिले। कोच होसाम हसन ने भी दावा किया कि फुटबॉल व्यवस्था अर्जेंटीना और मेसी के पक्ष में झुकी हुई थी।
मिस्र फुटबॉल संघ ने कहा कि कई विशेषज्ञों और विश्लेषकों ने भी टीम का समर्थन किया है। संघ ने जोर दिया कि विश्व फुटबॉल के सबसे बड़े मंच पर निष्पक्षता, पारदर्शिता और नियमों का समान रूप से पालन होना जरूरी है।
और पढ़ें: दिल्ली-एनसीआर में भारी बारिश से जलभराव, दिल्ली में 3 घंटे में 34.9 मिमी बारिश; गाजियाबाद में स्कूल बंद