पश्चिम बंगाल में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन—SIR) को लेकर विवाद के बीच चुनाव आयोग ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से अगले सप्ताह मुलाकात करने पर सहमति जताई है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) द्वारा मतदाता सूची के पुनरीक्षण में अनियमितताओं का आरोप लगाए जाने के बाद यह बैठक अहम मानी जा रही है।
चुनाव आयोग की ओर से गुरुवार को जारी बयान में कहा गया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार 2 फरवरी को शाम 4 बजे टीएमसी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात करेंगे। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व स्वयं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी करेंगी। यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब टीएमसी लगातार चुनाव आयोग पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पक्ष में काम करने का आरोप लगा रही है।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का कहना है कि चुनाव आयोग भाजपा के इशारे पर काम कर रहा है और एसआईआर की प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि 85 वर्ष से अधिक आयु के मतदाताओं और दिव्यांग व्यक्तियों को भी अपने दस्तावेजों की पुष्टि के लिए सुनवाई में बुलाया जा रहा है, जो अमानवीय और अनुचित है।
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ममता बनर्जी ने 25 जनवरी को राष्ट्रीय मतदाता दिवस के अवसर पर भी इस मुद्दे को उठाया था। उन्होंने कहा था कि चुनाव आयोग के सॉफ्टवेयर द्वारा पश्चिम बंगाल के करीब 1.5 करोड़ मतदाताओं को “तार्किक विसंगतियों” के आधार पर चिन्हित किया गया है। इनमें वे मतदाता भी शामिल हैं, जिनका नाम राज्य में वर्ष 2002 में हुए अंतिम गहन पुनरीक्षण से मैप नहीं किया गया है।
टीएमसी का आरोप है कि इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं को संदेह के दायरे में लाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करता है और इससे आम लोगों में भ्रम और भय पैदा हो रहा है। पार्टी ने मांग की है कि एसआईआर की प्रक्रिया पारदर्शी, मानवीय और निष्पक्ष होनी चाहिए।
आगामी बैठक में ममता बनर्जी चुनाव आयोग के समक्ष इन सभी मुद्दों को रखने की तैयारी में हैं। इस मुलाकात पर सभी राजनीतिक दलों और आम जनता की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इसके नतीजे राज्य की राजनीति और आगामी चुनावी प्रक्रिया पर असर डाल सकते हैं।
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