ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (AASU) ने राज्य में मतदाता सूचियों के विशेष पुनरीक्षण (स्पेशल रिवीजन) को लेकर विपक्षी राजनीतिक दलों द्वारा उठाए गए सवालों का समर्थन किया है। संगठन का कहना है कि जब तक राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) पूरी तरह त्रुटिरहित नहीं होगा, तब तक असम में स्वच्छ और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित नहीं किए जा सकते।
AASU के सलाहकार समुज्ज्वल भट्टाचार्य ने कहा कि असम में आज तक कोई भी चुनाव ऐसी मतदाता सूची के आधार पर नहीं कराया गया है, जो पूरी तरह से सत्यापित और त्रुटिरहित हो। उन्होंने कहा कि मतदाता सूचियों में खामियों की समस्या नई नहीं है और यह दशकों से चली आ रही है।
समुज्ज्वल भट्टाचार्य के अनुसार, 1985 के विधानसभा चुनावों के बाद से ही असम में मतदाता सूची को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। ये चुनाव असम समझौते के तुरंत बाद हुए थे। असम समझौता छह वर्षों तक चले उस आंदोलन के बाद हुआ था, जिसका उद्देश्य राज्य से संदिग्ध राष्ट्रीयता वाले लोगों को बाहर करना था। उस आंदोलन की मूल भावना यही थी कि राज्य की जनसांख्यिकी और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की शुचिता बनी रहे।
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उन्होंने कहा कि यदि मतदाता सूची में अवैध या अप्रमाणित नाम बने रहते हैं, तो चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सीधा असर पड़ता है। AASU का मानना है कि एनआरसी का उद्देश्य केवल नागरिकों की पहचान करना नहीं, बल्कि लोकतंत्र की नींव को मजबूत करना भी है। इसलिए एनआरसी और मतदाता सूची, दोनों का पूरी तरह शुद्ध और पारदर्शी होना जरूरी है।
AASU ने मांग की कि चुनाव आयोग और राज्य प्रशासन विशेष पुनरीक्षण की प्रक्रिया को गंभीरता से लें, ताकि योग्य नागरिकों का नाम न कटे और अपात्र लोगों को सूची से बाहर रखा जा सके। संगठन ने यह भी कहा कि त्रुटिरहित मतदाता सूची ही असम में भरोसेमंद और निष्पक्ष चुनाव की गारंटी बन सकती है।
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