भारत सरकार संसद में विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन विधेयक 2026 लाने की तैयारी कर रही है। इस प्रस्तावित कानून को लेकर कई तरह की अफवाहें और आशंकाएं सामने आई हैं। अब अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने विधेयक से जुड़े दावों और उनकी वास्तविकता स्पष्ट की है।
विनय मोहन क्वात्रा ने कहा कि भारत कोई अलग तरह का कानून नहीं ला रहा है। अमेरिका में 1938 से विदेशी एजेंट पंजीकरण कानून और 2010 से विदेशी खाता कर अनुपालन कानून जैसे प्रावधान मौजूद हैं। ऑस्ट्रेलिया ने 2018, कनाडा ने 2024 में इसी तरह के कानून बनाए हैं, जबकि ब्रिटेन की संबंधित व्यवस्था जुलाई 2025 में लागू हुई। यूरोपीय संघ भी इस दिशा में कानून बनाने की प्रक्रिया में है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित कानून किसी धर्म या समुदाय को निशाना नहीं बनाता। धार्मिक शिक्षा, पूजा स्थलों का रखरखाव और धर्म आधारित संस्थाओं की परोपकारी गतिविधियां विदेशी फंडिंग के लिए पात्र बनी रहेंगी।
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एक अन्य अफवाह के संबंध में उन्होंने कहा कि कानून विदेशी चंदे पर निर्भर गैर-सरकारी संगठनों, अस्पतालों, स्कूलों या धार्मिक संस्थानों की संपत्तियां जब्त करने के लिए नहीं है। पंजीकरण रद्द होने की स्थिति में विदेशी अंशदान से बनी संपत्तियों के प्रबंधन के लिए स्पष्ट व्यवस्था प्रस्तावित है। पंजीकरण दोबारा शुरू होने पर संपत्तियां और अप्रयुक्त धन वापस किए जाने का प्रावधान भी बताया गया है।
क्वात्रा ने कहा कि एफसीआरए विदेशी सहायता को रोकता नहीं है, बल्कि उसके लिए पंजीकरण, निर्धारित प्रक्रिया और उपयोग की जानकारी देना जरूरी करता है। उनके अनुसार, भारत में तीन मिलियन से अधिक गैर-सरकारी संगठन हैं, लेकिन केवल करीब 14,450 संस्थानों के पास एफसीआरए पंजीकरण है।
उन्होंने कहा कि प्रस्तावित बदलाव का उद्देश्य विदेशी वित्तीय प्रवाह में पारदर्शिता, बेहतर प्रशासन और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े हितों को मजबूत करना है, न कि कानून का पालन करने वाले संगठनों की गतिविधियों को रोकना।
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