चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों के सामने एक बड़ी कमी यह सामने आई कि फर्जी खबरों और दुष्प्रचार का प्रभावी तरीके से मुकाबला करने के लिए कोई ठोस प्रणाली मौजूद नहीं थी। उन्होंने बताया कि अब इस कमी को दूर करने के लिए सशस्त्र बलों की संरचना के भीतर एक विशेष तंत्र विकसित किया जा रहा है।
पुणे पब्लिक पॉलिसी फेस्टिवल में शुक्रवार को संबोधन के दौरान जनरल चौहान ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के समय न केवल सोशल मीडिया, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में भी कई भ्रामक और गलत सूचनाएं फैलाई गईं। इनमें कराची बंदरगाह के जलने से जुड़े फर्जी वीडियो जैसे उदाहरण शामिल थे, जिन्हें व्यापक रूप से साझा किया गया था।
दर्शकों के एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि हमारे पास ऐसी कोई व्यवस्था नहीं थी, जिसके जरिए हम फर्जी खबरों का तत्काल और प्रभावी ढंग से खंडन कर सकें। यह कमी केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं थी, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में भी देखने को मिली। अब हम एक ऐसी प्रणाली तैयार कर रहे हैं, जिससे भविष्य में इस तरह के दुष्प्रचार का मुकाबला किया जा सके।”
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जनरल चौहान ने इस अवसर पर सशस्त्र बलों के थिएटराइजेशन की प्रक्रिया पर भी बात की। उन्होंने कहा कि सशस्त्र बलों के एकीकृत थिएटर कमांड के गठन को लेकर विभिन्न स्तरों पर मतभेद रहे हैं। हालांकि, यह प्रक्रिया लगातार आगे बढ़ रही है और इसका उद्देश्य तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय और परिचालन क्षमता को मजबूत करना है।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आधुनिक युद्ध केवल हथियारों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सूचना युद्ध और मनोवैज्ञानिक प्रभाव भी इसका अहम हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में फर्जी खबरों और दुष्प्रचार से निपटने की क्षमता को मजबूत करना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है।
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