केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने दवाओं की बिक्री और आपूर्ति पर निगरानी मजबूत करने के लिए ड्रग्स रूल्स, 1945 में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत प्रिस्क्रिप्शन के आधार पर दवाएं बेचने वाले मेडिकल स्टोरों में सीसीटीवी निगरानी अनिवार्य की जा सकती है। मंत्रालय ने 8 सितंबर 2026 को ड्रग्स (अमेंडमेंट) रूल्स, 2026 का मसौदा जारी किया है।
मसौदे में ड्रग्स रूल्स, 1945 के नियम 65 में बदलाव का प्रस्ताव है। इसके तहत नियम 65 के उप-नियम (2) के बाद नया उप-नियम 2A जोड़ा जाएगा। प्रस्ताव के अनुसार, थोक बिक्री को छोड़कर, पंजीकृत चिकित्सा व्यवसायी के पर्चे पर दी जाने वाली किसी भी दवा की आपूर्ति सीसीटीवी निगरानी वाले परिसर में करनी होगी।
मेडिकल स्टोर या संबंधित परिसर में सीसीटीवी सिस्टम लगाना और उसका रखरखाव करना अनिवार्य होगा। साथ ही, निगरानी के दौरान तैयार होने वाली रिकॉर्डिंग को कम से कम तीन महीने तक सुरक्षित रखना होगा।
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मसौदे में विशेष रूप से यह नहीं कहा गया है कि सीसीटीवी की अनिवार्यता केवल शेड्यूल एच, एच1 और एक्स दवाओं पर लागू होगी। इसमें पंजीकृत चिकित्सा व्यवसायी के पर्चे पर दी जाने वाली किसी भी दवा का उल्लेख किया गया है।
सरकार ने इन प्रस्तावित नियमों पर लोगों से आपत्तियां और सुझाव भी मांगे हैं। अधिसूचना स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी की गई है। मसौदा नियमों पर विचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराए जाने के बाद 30 दिन की अवधि समाप्त होने पर किया जाएगा।
लोग अपनी आपत्तियां और सुझाव मंत्रालय के अवर सचिव (ड्रग्स), स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली को भेज सकते हैं। अधिसूचना में ईमेल के जरिए सुझाव भेजने का विकल्प भी दिया गया है।
फिलहाल यह प्रस्ताव मसौदा चरण में है और अंतिम नियम नहीं बना है। सरकार द्वारा परामर्श प्रक्रिया के दौरान प्राप्त सुझावों और आपत्तियों पर विचार करने के बाद इसमें बदलाव संभव है। अंतिम अधिसूचना जारी होने पर ही नई व्यवस्था लागू होगी।
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